Friday, August 11, 2017

अमित शाह पर खबर लिखने के बाद उसे डिलीट करने देने का सिलसिला जारी ..

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मीडिया के बीच खट्टे-मीठे रिश्तों की खबरें हमेशा छाई रहती है. यह बात चर्चा में रहती है की शाह पर खबर लिखने से पहले कोई भी मीडिया हाउस कई बार सोचता है. अंग्रेजी अख़बार टेलीग्राफ ने कुछ दिन पहले एक खबर में लिखा था कि इस साल जब उत्तर प्रदेश का प्रचार ख़त्म हो रहा था तब शाह से पूछा गया कि वे मीडिया के प्रति इतनी 'उपेक्षा का और आक्रामक' भाव क्यों रखते हैं तो उन्होंने बिल्कुल साफ़ कहा कि जो मीडिया घराने भाजपा और मोदी सरकार के प्रति आलोचनात्मक रुख़ रखते हैं, ख़बरदार, उन पर हमारी नज़र है''।

बीते दिनों बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्यसभा का चुनाव लड़ा और वो जीत भी गए लेकिन इससे पहले अमित शाह की सम्पति को लेकर खुलासा हुआ कि उनकी सम्पति में 300 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ. मीडिया में यह खबर आने के बाद काफी चर्चाओं में रही जिसके बाद बीजेपी को एक पत्र जारी कर सफाई देनी पड़ी कि शाह कि सम्पति में हुए इस इजाफे का कारण क्या है.

इस खबर को देश के सभी अखबारों और न्यूज़ वेबसाईट ने छापा लेकिन देश के सबसे बड़े मीडिया घराने ने इस खबर को अपनी सभी वेबसाइट्स से प्रकशित होने के बाद हटा दिया. जिसके बाद सोशल मीडिया में यह चर्चा आम हो गई की बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को लेकर मीडिया घरानों में भी वैसा ही डर है जैसा कई बीजेपी नेताओं में रहता है.

फिर हटाई गई अमित शाह पर लिखी खबर
इसी तरह गूगल पर सर्च करते हमें मिला कि 11 अगस्त को एक अग्रणीय अंग्रेजी न्यूज़ पोर्टल ने अमित शाह को लेकर एक खबर लिखी जिसे चार घंटे बाद हटा दिया गया. गूगल पर अमित शाह 'की-वर्ड' डालकर आप इस खबर को ढूंढ सकते हैं. इसका शीर्षक है- Amit Shah's RS entry, the first step to PM's post in 2024 जिसका अर्थ यह है की बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कि राज्यसभा में एंट्री का मतलब है कि साल 2024 में वह प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं और राज्यसभा सभा में उनकी एंट्री इस दिशा में पहला कदम है.

इस खबर को क्लिक करने के बाद आप पाएंगे की यह खबर ओपन नही होती है . इसका मतलब है कि खबर अब उपलब्ध नही है या इसे हटा दिया गया है. शायद अब इस खबर को गूगल न्यूज़ से भी हटा दिया गया हो लेकिन इस तरह के वाकये लगातार देखने को मिलते हैं. ऐसा पहली बार नही है जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर लिखने से पहले मीडिया घरानों को सोचना पड़ा हो.

इससे पहले पांच साल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की संपत्ति बढ़ गई है. यह खबर एक बड़े मीडिया संस्थान ने हटा ली। इसे कहा गया था की 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्होंने जो हलफनामा दाखिल किया था और 2017 में राज्यसभा के लिए जो हलफनामा दाखिल किया है, उसके मुताबिक उनकी संपत्ति में 300 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है.

Thursday, August 10, 2017

12 अगस्त रात मे दिन जैसा प्रकाश नही होगा लेकिन ये मौका ..

12 अगस्त रात मे दिन जैसा प्रकाश नही होगा लेकिन ये मौका आसमान में टूटते तारों की आतिशबाज़ी देखने का है
अब से कुछ ही समय के बाद हम इस मौसम के श्रेष्ठ और रंगीन उल्कापात - पेर्सेइड मेटेओर शावर का आनंद लेने जा रहे हैं।

खगोल वैज्ञानिक गणनाओं के आधार पर 11-12 अगस्त 2017 और 12-13 अगस्त 2017 की मध्यरात्रि से भोर के झुटपुटे तक पेर्सेइड उल्कापात के विहंगम दृश्य का अवलोकन किया जा सकता है।
आसमानी आतिशबाज़ी की यह घटना 12-13 अगस्त की मध्यरात्रि से भोर तक अपने चरम पर होगी।
उल्कापात एक खगोलीय घटना है जिसमें रात्रि आकाश में कई उल्काएं एक बिंदु से निकलती नज़र आती हैं।

ये उल्काएं या मेटिअरॉइट (सामान्य भाषा में टूटते तारे) धूमकेतु या पुच्छल तारों के पीछे घिसटते धूल के कण, पत्थर आदि होते हैं जो पृथ्वी के वातावरण में बहुत तीव्र गति से प्रवेश करते हैं और हमें आसमानी आतिशबाज़ी का नज़ारा दिखाई देता है।
अधिकांश उल्काएँ आकार में धूल के कण से भी छोटी होती हैं जो विघटित हो जाती हैं और सामान्यतः पृथ्वी की सतह से नहीं टकरातीं।
यदि उल्कापात के दौरान उल्काओं का कुछ अंश वायुमंडल में जलने से बच जाता है और पृथ्वी तक पहुँचता है तो उसे उल्कापिंड या मेटिअरॉइट कहते हैं।
हर वर्ष 17 जुलाई से 24 अगस्त के दौरान हमारी पृथ्वी स्विफ़्ट टटल धूमकेतु के पास से गुज़रती है।
स्विफ़्ट टटल धूमकेतु ही पेर्सेइड उल्कापात या पेर्सेइड मेटेओर शावर का सूत्रधार है।
धूमकेतु पत्थर, धूल, बर्फ़ और गैस के बने हुए छोटे-छोटे खण्ड जो ग्रहों के समान सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
स्विफ्ट टटल धूमकेतु का मलबा इसकी कक्षा में बिखरा रहता है जो हमें स्पष्ट रूप से अगस्त के पहले हफ्ते के बाद पृथ्वी से दिखाई देता है।
स्विफ्ट टटल धूमकेतु के छोटे अंश तेज़ी से घूमते पेर्सेइड उल्का के रूप में पृथ्वी के ऊपरी वातावरण में 2 लाख, 10 हज़ार किलोमीटर प्रति घंटे की गति से घूमते हैं जो रात्रि आकाश में तीव्र चमक के साथ बौछार करते नज़र आते हैं।
रोशनी वाले स्थान से दूर रात्रि आकाश में सैंकड़ों उल्काएँ नज़र आती हैं जो पेर्सेइड उल्कापात को यादगार बना देती हैं।
स्विफ़्ट टटल धूमकेतु एक विकेन्द्री (अव्यवस्थित केन्द्रक के साथ) अंडाकार कक्षा में परिक्रमा करता है जो लगभग 26 किलोमीटर चौड़ी होती है।
जब यह सूर्य से अधिकतम दूरी पर होता है तो यह प्लूटो की कक्षा के बाहर होता है और जब सूर्य के बहुत नज़दीक होता है तो पृथ्वी की कक्षा के अन्दर होता है।
यह 133 वर्षों में सूर्य की परिक्रमा करता है।
अपने परिक्रमा पथ में जब यह धूमकेतु सूर्य के नज़दीक आता है तो सूर्य की गर्मी से इस पर जमी बर्फ़ पिघल जाती है जिसकी वजह से कुछ नया पदार्थ इसके परिक्रमा पथ में शामिल होता जाता है।
स्विफ़्ट टटल धूमकेतु सूर्य के अति निकट बिंदु यानी 'पेरीहेलिओन' पर दिसम्बर 1992 में पहुंचा था। इस स्थान पर अब यह जुलाई 2126 में पहुंचेगा।
पेर्सेइड उल्कापात उत्तरी गोलार्ध में देखा जा सकता है जहाँ यह आसमान के उत्तरी-पूर्वी भाग में नज़र आता है जिसे आखों से देखा जा सकता है।
इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं हैं।
पेर्सेइड उल्कापात की बौछार या प्रकाश बिंदु पेर्सेयस के दोहरे तारामंडल (पेर्सेयस डबल क्लस्टर) की पृष्ठभूमि में नज़र आता है और पेर्सेयस के नाम पर ही पेर्सेइड उल्कापात का नामकरण किया गया है।
हालाँकि यह महज़ एक संयोग है क्योंकि पेर्सेयस तारामंडल हमसे कई प्रकाश वर्ष की दूरी पर है जबकि पेर्सेइड उल्का पृथ्वी की सतह से लगभग 100 किलोमीटर दूर प्रकाशित होते हैं।
पेर्सेइड उल्कापात से जुड़ी एक प्राचीन यूनानी किवदंती है कि जब ईश्वर ज़ीउस ने मरणासन्न युवती डेनी से विवाह रचाया उसी समय पेर्सेइड उल्कापात के रूप में स्वर्ण वर्षा हुई और पेर्सेयस नक्षत्र मंडल का जन्म हुआ।
तभी से पेर्सेइड उल्कापात पेर्सेयस नक्षत्र मंडल की पृष्ठभूमि में ही होता आ रहा है।
स्विफ़्ट टटल धूमकेतु हर समय सूर्य की परिक्रमा करता है। इसके परिक्रमा पथ में धूमकेतु के पीछे घिसटते धूल के कण, पत्थर आदि का मलबा ही उल्का प्रवाह या मेटिअर स्ट्रीम कहलाता है।
समय के साथ विशाल ग्रहों, खासकर ब्रहस्पति ग्रह के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण इन धूल कणों के परिक्रमा पथ में कुछ बदलाव आ जाता है। इसी कारण से पृथ्वी से इसकी दूरी बदलती रहती है।
यदि इन परिवर्तनों से धूमकेतु के धूलकणों का परिक्रमा पथ पृथ्वी के निकट आ जाता है तो पेर्सेइड उल्कापात का नज़ारा सामान्य से कहीं अधिक विहंगम हो जाता है।
वर्ष 2016 में ब्रहस्पति के प्रभाव के चलते पेर्सेइड उल्का प्रवाह की दर लगभग दोगुनी हो गई थी।
इन खगोलीय गणनाओं के आधार पर ही उल्का प्रवाह के चरम स्तर के दिन व समय का पूर्वानुमान लगाया जाता है।
एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ दि करीबियन की रिपोर्ट के अनुसार ला पिटाहाया, कबो रोजो, पुएर्टो रिको में पेर्सेइड उल्का की भव्य बरसात 12 अगस्त 2016 को भोर से पूर्व हुई थी।
यहाँ स्थानीय समय प्रातः 3:40 से 4 बजे के बीच 20 मिनट में 150 उल्काएं देखी गई थीं।
लियोनिड उल्कापात जो कि नवम्बर में होता है, पेर्सेइड उल्कापात के श्रेष्ठ प्रदर्शन से भी 10 गुना भव्य होता है।
अभी तक के उल्का इतिहास में लियोनिड उल्कापात सबसे बड़े उल्कापात के रूप में दर्ज है जो कि 12 नवम्बर 1833 में हुआ था और इसमें प्रति सेकंड 20 से 30 उल्काओं की बौछार हुई थी।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस वर्ष पेर्सेइड उल्कापात में 150 उल्का प्रति घंटे नज़र आयेंगी जो सामान्य से अधिक हैं परन्तु उल्काओं की यह बढ़ी संख्या चन्द्रमा की चमक में छुप जाएगी।
इस दौरान चन्द्रमा चमकदार और उभरा हुआ दिखाई देगा यानी पेर्सेइड उल्कापात का नज़ारा कुछ कमज़ोर पड़ जाएगा, जैसा कि नासा के उल्का विशेषज्ञ बिल कूक का कहना है।
खगोलविद उम्मीद जता रहे हैं कि पेर्सेइड उल्कापात की चमक चन्द्रमा की रोशनी से अधिक नहीं दबेगी और फिर देखने वालों का उत्साह इसकी चमक को बरकरार रखेगा।
पेर्सेइड उल्कापात की समाप्ति पर और सुबह के झुटपुटे पर पूर्व की ओर चमकीला ग्रह शुक्र देखा जा सकता है, जो कि सूर्य और चन्द्रमा के बाद तीसरा सबसे चमकदार ग्रह है।
तो आइये पेर्सेइड उल्कापात की दुर्लभ घटना का गवाह बनने की तैयारी करें।
निमिष कपूर
वरिष्ठ वैज्ञानिक
(लेखक भारत सरकार के साइंस फ़िल्म्स डिविज़न के प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं।)
स्रोत : बी बी सी हिंदी

Wednesday, August 9, 2017

विवादों में घिरे बिहार डिप्टी CM, लगा ये बड़ा आरोप

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।
                              विपक्ष को आड़े हाथों लेने वाली मोदी सरकार आए दिन विवादों में घिरी नजर आती है। मोदी सरकार की मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्री को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। ऐसे में अब इस श्रेणी ताजा मामला जुड़ा है बिहार के डिप्टी सीएम और भाजपा नेता सुशील मोदी से जिन पर फर्जी ‌डिग्री के जरिए कॉलेज में प्रोफेसर पद पाने का आरोप लगा है।

एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक बिहार के स्वास्‍थ्य मंत्री और वरिष्‍ठ जेडीयू नेता रामधनी ‌स‌िंह ने आरोप लगाया है कि बीजेपी नेता सुशील मोदी की पत्‍नी को फर्जी डिग्रियों के जरिए गर्वनमेंट डिग्री कालेज में प्रोफेसर की नौकरी दी गई है। पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी की पत्‍नी जेसू जार्ज पटना के गर्वनमेंट डिग्री कालेज में प्रोफेसर हैं। नेता ने आरोप लगाया है कि मोदी ने फर्जी डिग्री के जरिए कॉलेज के प्रोफेसर पद तक पहुंची हैं।

ये बात उस समय की है जब बिहार के स्वास्‍थ्य मंत्री रामधनी सिंह की बेटी को फर्जी कागजातों के जरिए सरकारी अस्पताल में ग्रेड 3 की नौकरी पाने के आरोपों के बाद उन्हें इस्तीफा तक देना पड़ा था। कुछ दिन पहले ही यह आरोप बीजेपी के नेताओं ने लगाए थे। जिसके बाद भाजपा नेता सुशील मोदी ने भी स्वास्‍थ्य मंत्री से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है।

रामधनी सिंह ने पलटवार करते हुए सुशील मोदी की पत्नी जेसू जार्ज पर ही फर्जी डिग्री से नौकरी पाने के आरोप लगा दिए। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही इस संबंध में सबूत वो मीडिया को देंगे। सासाराम में मीडिया से बात करते हुए रामधनी सिंह ने बताया कि मोदी की पत्नी का मामला पहले से ही विजीलेंस के पास है जो 90 के दशक के लेक्चरर घोटाले की जांच कर रही है। सिंह दावा किया कि मोदी लोगों के सामने ईमानदार होने का दावा करते हैं लेकिन जल्द ही वे उनका चेहरा बेनकाब करेंगे।

मोदी सरकार ने किया सदी का सबसे बड़ा घोटाला, राज्यसभा में दिखाया गया बड़ा सबूत

नोटबंदी के बाद क्या हासिल हुआ, कितना कालाधन बैंकों में जमा हुआ और कुल कितने नोट जमा हुए इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आ पाई है। ऐसे में राज्यसभा में नोटबंदी को मोदी सरकार का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए हंगामा हुआ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने राज्यसभा में 500 के नोटों की फोटोकॉपी दिखाकर मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। इस तरह  RBI को अपना Report जनता के सामने रखना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने राज्यसभा में 500 के नोटों की फोटोकॉपी दिखाते हुए कहा, ‘उन्हें पता चल गया है कि सरकार ने नोटबंदी क्यों की। सिब्बल ने कहा’ ‘रिजर्व बैंक दो तरह के नोट छाप रहा है, अलग-अलग साइज के, अलग-अलग डिजाइन के, अलग-अलग फीचर्स के। उन्होंने कहा, ‘आज हमें पता चला है कि ऐसा क्यों हो रहा है? जो नोट बीजेपी कार्यकर्ता के पास इलेक्शन के दौरान आए, वो यही नोट हैं।’

सिब्बल की ओर से यह आरोप लगाते ही सदन में मौजूद कांग्रेस पार्टी के तमाम संसद शेम-शेम करते हुए चिल्लाने लगे। विपक्ष की ओर से नेता सदन गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह इस सदी का सबसे बड़ा घोटाला है। दो हजार और पांच सौ के नोट दो किस्म के छापे गए हैं। एक पार्टी के लिए और दूसरा सरकार के लिए। आजाद ने कहा, ‘इतनी भ्रष्ट सरकार को पांच मिनट भी सत्ता में रहने का हक नहीं है।’

सिब्बल के अलावा राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और जेडीयू नेता शरद यादव ने भी इस मुद्दे को सदन में उठाया। इसके जवाब में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस बेबुनियाद बयान दे रही है। जेटली ने कहा कि आप इस तरह राज्यसभा में कागज नहीं लहरा सकते हैं, देश की करेंसी के बारे में इस तरह बयान नहीं दे सकते हैं।

कपिल सिब्बल ने इस मुद्दे पर प्रेस कांफ्रेंस की। उन्होंने कहा कि देश को इसका सच पता लगना चाहिए, अगर आरबीआई ये जानता है कि देश में एक ही नंबर के दो नोट हैं तो उन्होंने इसका जिक्र अपनी वेबसाइट पर क्यों नहीं किया है। वित्त मंत्रालय को सिर्फ एक ही तरह के नोटों की व्यवस्था करनी चाहिए। अगर आरबीआई कहता है कि हम इन्हें वापस लेंगे, तो क्या देश को एक बार फिर लाइनों में खड़ा होना पड़ेगा। सिब्बल की ओर से यह आरोप लगाते ही सदन में मौजूद कांग्रेस पार्टी के तमाम संसद शेम-शेम करते हुए चिल्लाने लगे। विपक्ष की ओर से नेता सदन गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह इस सदी का सबसे बड़ा घोटाला है। दो किस्म के हजार के नोट और दो किस्म के पांच सौ के नोट छापे गए हैं। एक पार्टी चलाए और एक सरकार चलाए। आजाद ने कहा, ‘इतनी भ्रष्ट सरकार को पांच मिनट भी सत्ता में रहने का हक नहीं है।’

इस पर जेडी(यू) सांसद शरद यादव ने कांग्रेसी नेताओं का समर्थन करते कहा कि यह कोई छोटी बात नहीं है। सरकार को जवाब देना होगा। इस पर उपसभापति ने कहा कि वह इस मामले के एक्सपर्ट नहीं हैं। इसलिए सांसदों को अलग से नोटिस देना होगा, तभी इस मुद्दे पर कोई चर्चा हो सकती है।

Tuesday, August 8, 2017

4G LTE नेटवर्क यूजर्स के लिए जितना फायदेमंद उतना ही खतरनाक, जाने इस बारे में..

भारत में इस समय 4G Networks की माँग तेजी से बढ़ रही हैं ,मौजूदा समय में 4G LTE बाजार में उपलब्ध सबसे तेज मोबाइल इंटरनेट बैंड है। इसका फायदा यूजर्स को कॉलिंग और इंटरनेट के इस्तेमाल के समय मिलता है। 4G LTE आपके इंटरनेट को हाई स्पीड देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 4G LTE जितना आपके लिए फायदेमंद है उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है।
चीन की अग्रणी सुरक्षा कंपनी 360 टेक्नोलॉजी के यूनीकॉर्न टीम के शोधकर्ताओं ने 4G LTE नेटवर्क में CSFB (सर्किट स्विच्ड फॉलबैक) में एक जोखिम के संभावित खतरे को दिखाते हुए बताया कि, कैसे हैकर्स विक्टिम की जानकारी के बिना उनके कॉल और एसएमएस रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। नेवादा में हुए हैकर शिखर सम्मेलन ब्लैकहैट यूएसए 2017 और DEF कॉन में "घोस्ट टेलिफोनीस्ट" के रूप में जाना जाने वाला अटैक को प्रस्तुत किया गया था।

सीएसएफबी (सर्किट स्विच्ड फ़ॉलबैक) क्या है?

आम तौर पर यूजर्स इंटरनेट और टेलीकम्यूनिकेशन नेटवर्क की पूरी प्रक्रिया से परिचित नहीं होते हैं। LTE प्रदाताओं के लिए SFSB अंतरिम समाधान है, जो कॉल पूरा करने के लिए या टेक्स्ट मैसेज भेजने के लिए 3G या 2G नेटवर्क के भरोसे रहते हैं।
किसी भी नेटवर्क से कनेक्ट करते समय पूरे प्रक्रिया के दौरान फोन के पहचान को साबित करने के लिए एक ऑथेंटिकेशन कोड भेजना होता है, लेकिन जब कोई डिवाइस 4G LTE नेटवर्क से एक निचले नेटवर्क पर स्विच करता है तो कोई प्रमाणीकरण नहीं किया जाता है। ऑथेंटिकेशन के अभाव में हैकर्स विक्टिम के कॉल्स और एसएमएस तक के एक्सेस हासिल कर लेते हैं। यह प्रक्रिया सिर्फ 60 सेकंड में पूरा होता है।
यह यूजर्स को कैसे प्रभावित करता है?
अधिकतर ऑनलाइन सेवाओं की ओर से उठाए गए उन्नत सुरक्षा उपायों के लिए हमें धन्यवाद देना चाहिए। यूजर्स के बैंकिंग या उनके सोशल मीडिया अकाउंट को साइन करने से पहले उनके फोन में एक ऑथेंटिकेशन कोड भेजा जाता है।
जब हैकर्स आपके कॉल और एसएमएस का एक्सेस प्राप्त कर लेते हैं, तो उनके लिए काफी आसन हो जाता है उसे पासवर्ड को रीसेट करना। हैकर्स आपके अकाउंट की सेटिंग को रिसेट कर फोन में ओटीपी जनरेट कर आसानी से आपके अकाउंट को हैक कर सकता है। जो खतरनाक साबित हो सकता है।

कैसे करें बचाव:

"यूनिकोर्न टीम वायरलेस सुरक्षा शोधकर्ता हुआंग लिन ने बताया,"हमने मोबाइल कम्युनिकेशंस एलायंस (जीएसएमए) के लिए ग्लोबल सिस्टम को इस सब के  कमजोरी के बारे में जानकारी दी है।"