Saturday, February 17, 2018

आजाद भारत में सबसे बड़ा घोटाला मोदी के कार्यकाल में घोटालेबाज फरार

आजाद भारत में बैंकिंग के सबसे बड़े घोटाले की बात तो बतौर एफआईआर अब दर्ज है। याद करें पुराने घोटालों को। हर्षद मेहता का 700 सौ करोड़ रू, ललित मोदी का आईपीएल का 275 करोड़ रू और विजय माल्या का 6-7 हजार करोड़ रू के घोटाले के मुकाबले नीरव मोदी का घोटाला है कोई 11,360 करोड़ रू का।

Tuesday, February 6, 2018

नौकरियां कहां हैं, नौजवान कहां हैं, उनकी कहानियां कहां हैं

ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि सरकार पांच साल से ख़ाली पड़े पद समाप्त करने जा रही हैं। यह साफ नहीं है कि लगातार पांच साल से ख़ाली पड़े पदों की संख्या कितनी है। अवव्ल तो इन पर भर्ती होनी चाहिए थी मगर जब नौजवान हिन्दू मुस्लिम डिबेट में हिस्सा ले ही रहे हैं तो फिर चिन्ता की क्या बात। यह आत्मविश्वास ही है कि जिस समय रोज़गार बहस का मुद्दा बना हुआ है
उस समय यह ख़बर आई है।
वित्त मंत्रालय ने  अलग अलग मंत्रालयों और विभागों को ऐसे निर्देश भेज दिए हैं। विभाग प्रमुखों से कहा गया है कि ऐसे पदों की पहचान करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपे।

Saturday, February 3, 2018

किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उनसे झूठ बोला गया

भारतीय जनता पार्टी किसानों से दावा कर रही है कि मैंने  स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू कर दिया..बल्कि इसके नाम पर किसानों को केवल लॉलीपॉप दिया गया
निशुल्क आर्थिक समाचार संकलन बजट की इस बोर दुपहरी में झोला उठाने का टाइम आ गया है भारत के किसानों ने आज हिन्दी के अख़बार खोले होंगे तो धोखा मिला होगा। जिन अखबारों के लिए वे मेहनत की कमाई का डेढ़ सौ रुपया हर महीने देते हैं, उनमें से कम ही ने बताने का साहस किया होगा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उनसे झूठ बोला गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि रबी की फसल के दाम लागत का डेढ़ गुना किये जा चुके हैं। ख़रीफ़ के भी डेढ़ गुना दिए जाएंगे। शायद ही किसी अख़बार ने किसानों को बताया होगा कि इसके लिए सरकार ने अलग से कोई पैसा नहीं रखा है। 

Thursday, January 4, 2018

घर बैठे मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ने की लिए बस यूँ ही एक बार फोन करे..

आज से आपकों मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करवाने के लिए रिटेल शॉप के चक्कर नहीं काटने होगे।




सरकार ने सिम कार्ड को आधार नंबर से जोड़ने की प्रक्रिया की आखिरी तारीख ज़रूर टाल दी है, लेकिन वैरिफिकेशन तो अब भी ज़ारी है अच्छी खबर यह है कि मंगलवार को यह प्रक्रिया आसान बना दी गई. अब सभी टेलीकॉम सब्सक्राइबर सिर्फ एक नंबर पर कॉल करके अपने सभी मोबाइल नंबर को आधार से वैरिफाई कर सकते हैं, चाहे नेटवर्क कोई भी हो. यह खबर राहत की सांस लेकर आई है, क्योंकि अब तक ग्राहक अपने मोबाइल नंबर को आधार नंबर से जोड़ने के लिए टेलीकॉम कंपनियों के ऑफलाइन स्टोर में जाने के लिए मजबूर थे. अब ग्राहक आईवीआर सेवा का इस्तेमाल करके अपने घर से ही मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ सकते हैं.

Tuesday, January 2, 2018

स्टेट बैंक ने आपकी ग़रीबी पर ज़ुर्माना वसूला 1771 करोड़

स्टेट बैंक आफ इंडिया ने अप्रैल से नवंबर 2017 के बीच उन खातों से 1771 करोड़ कमा लिया है,जिनमें न्यूनमत बैलेंस नहीं था। यह डेटा वित्त मंत्रालय का है। न्यूनतम बैलेंस मेट्रो में 5000 और शहरी शाखाओं के लिए 3000 रखा गया है।

स्टैट बैंक आफ इंडिया ने जुलाई से सितंबर की तिमाही में 1581 करोड़ की वसूली की थी। यह पैसा बैंक की दूसरी तिमाही के मुनाफे से भी ज़्यादा है।
स्टेट बैंक के पास 42 करोड़ बचत खाताधारक हैं। इनमे से 13 करोड़ बेसिक बचत खाते और जनधन योजना के तहत खुले खातों से न्यूनतम बचत न होने का जुर्माना नहीं लिया गया। उन्हें मुक्त रखा गया।
29 करोड़ बचत खाताधारकों में ज़रूर ऐसे रहे होंगे जो अपने खाते में न्यूनतम बचत नहीं रख पाते होंगे, इसका संबंध उनकी आर्थिक स्थिति से ही होगा। इनके खाते से 100-50 काटते काटते बैंक ने 1771 करोड़ उड़ा लिए। अगर इनके पास पैसा होता तो क्यों ये कम रखते। ज़ाहिर है रखते ही।

मगर इस कमज़ोर आर्थिक स्थिति में भी बैंक ने उनसे जुर्माना वसूला। ये एक किस्म का चंपारण का तीन कठिया सिस्टम है जिसके तहत किसानों को अपने खेत के तीन हिस्से में नील की खेती करनी ही होती थी ताकि नील के मैनेजरों का मुनाफा और बढ़ सके।
स्टैट बैंक आफ इंडिया पर एनपीए का बोझ सबसे ज़्यादा है। बैंक की हालत खस्ता है। वह उन लोगों से जुर्माना नहीं वसूल नहीं पा रहा जो उसके लाख करोड़ से भी ज़्यादा लोन लेकर चंपत हो चुके हैं आपकी नासमझी का लाभ उठाकर इस देश में नौटंकी हो रही है।

एनपीए के बाद नोटबंदी ने बैंकों को भीतर से कमज़ोर कर दिया है। बैंक ने खुद को बचाने के लिए कमज़ोर लोगों की जेब काट ली। गला काट लिया। आप चुप रहिए। सिसकते रहिए और अपनी मेहनत कमाई से बैंक को 1771 करोड़ देते रहिए।
इंडियन एक्सप्रेस ने यह ख़बर छापी है। स्टेट बैंक की हिम्मत देखिए, जवाब तक नहीं दिया है। कर क्या लोगो, ख़बर छाप लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा। यह संवेदनशीलता है उन बैंकों की जहां हम पैसे के साथ अपना भरोसा जमा करते हैं। सबको पता है कि टीवी आपको पाकिस्तान और तीन तलाक में उलझा कर रखे हुए हैं और इधर चुपके से आपकी जेब कतरी जा रही है।

हमने इस ख़बर के बाद एक हिन्दी अख़बार को चेक किया। उसके पहले पन्ने पर स्टेट बैंक की ख़बर थी। कि बैंक ने होम लोन पर ब्याज़ दर कम कर दिया है। गृह ऋण सस्ता हुआ। लेकिन आपका ही पैसा आपके खाते से कट गया, उसकी कोई ख़बर नहीं है। आपको अखबार गृह ऋण के जश्न में उलझा कर मूर्ख बना रहे हैं। अख़बार ख़रीदने से अख़बार पढ़ना नहीं आता है। पढ़ना सीखें। हिन्दी अख़बारों की चतुराई से सावधान रहिए।

पंजाब नेशनल बैंक ने भी इस ज़बरन वसूली से 97.34 करोड़ कमाए हैं। सेंट्रल बैंक ने 68.67 करोड़ और कैनरा बैंक ने 62.16 करोड़ कमाए हैं। पंजाब और सिंध बैंक ने इस तरह का जुर्माना नहीं लिया है। वह ऐसा करने वाला एकमात्र बैंक है।

खाते में कम पैसा होने का जुर्माना वसूला जा रहा है। आप नगद लेन देन न कर पाए इसके लिए जबरन रास्ते बंद किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि जितना भी पैसा है, बैंक में रखिए। जब आप बैंक में रखते हैं तो कहा जाता है कि कम रखा है, चलो अब जुर्माना भरो। ज़्यादा रखेंगे तो ब्याज़ कम दिया जाएगा। आप देखिए कि आप अपनी आर्थिक स्वतंत्रता गंवा रहे हैं या पा रहे हैं? क्या ग़रीब होने का जुर्माना लगेगा अब इस देश में?

Dissimilar:// यह रिपोर्ट रवीश कुमार के कस्बा नामक ब्लाग से लिया गया है