Sunday, November 19, 2017

पहले चुनाव जीतने के लिये भाजपा विकास का ब्लू प्रिंट लाती थी और अब ब्लू फिल्म: राज ठाकरे

गुजरात में जिस तरह से हार्दिक पटेल का कथित वीडियो सामने आया उसके बाद राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला है।

ठाकरे ने मोदी सरकार पर हमला लरते हुए कहा कि, 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा विकास का ब्लू प्रिंट लाती थी लेकिन, अब वह गुजरात का चुनाव ब्लू फिल्म दिखाकर जीतना चाहती है। भाजपा ने अब लोगों के निजी जीवन में ताकझांक शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा कि, यदि सिर्फ गुजरातियों के लिए ट्रेन चलानी है और विदर्भ को अलग करने के समृद्धि मार्ग बनाना है तो कतई मंजूर नहीं है।

राज ने कहा कि, बुलेट ट्रेन सिर्फ गुजरत के लिए और एक लाख करोड़ का कर्ज सारे देश वासी भरें, यह कहां की इंसाफी है। इसलिए मनसे इस बुलेट ट्रेन का विरोध कर रही है।

महाराष्ट्र के ठाणे में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने योग दिवस और स्वच्छ भारत अभियान की जमकर खिल्ली उड़ाई।

उन्होंने कहा कि, देश में आज बलात्कार, लूट, फरेब और जाति, धर्म के नाम पर दुकान चल रही है। पहले सिर्फ मुल्ले और मौलवी फतवा निकालते थे, लेकिन अब जैन साधक भी यह कर रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री इन सब पर रोक लगाने की बजाए योग करने के लिए उत्साहित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में गंगा नदी में शव तैर रहे हैं, ऐसे बनेगा स्वच्छ भारत। प्रधानमंत्री गुजरात के प्रधानमंत्री की तरह से पेश आ रहे हैं।

ठाकरे ने कहा कि, भाजपा सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार कर रही है, भाजपा सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का मजाक उड़ाती है, लेकिन राहुल ने पीएम मोदी सहित तमाम भाजपा नेताओं की नाक में दम कर रखा है, जिसकी वजह से अब भाजपा को कुछ और सूझ नहीं रहा है।

Friday, November 17, 2017

प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का जश्न तो ठीक है मगर सर्वे के कई जवाब शर्मसार करने वाले भी हैं।

हम नहीं हमारे भारत के ये 2, 464 बकलोल लोग

2,464 लोग वो लोग हैं जो पीयू रिसर्च में शामिल हुए हैं। यही भारत हैं। भारत की आत्मा गांवों में नहीं, सर्वे के सैंपल में रहती है। सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे भवन्तु मोदीमया। लोकप्रियता भी एक किस्म का बुख़ार है। कई लोग थर्मामीटर लिए दिन रात नापते रहते हैं। जिसे देखो थर्मामीटर लिए घूम रहा है। अक्तूबर के महीने में कई लेख छपे कि मोदी की लोकप्रियता घटी है। नवंबर में लेख छप रहे हैं कि मोदी की लोकप्रियता बढ़ी है। घटी तो बस नौकरी और कमाई है। किसानों के पास दाम हैं न दवाई है। फिर भी मोदी लोकप्रिय हैं। इसमें कोई शक नहीं है। सर्वे ने जो बताया उसके पहले हम भारत के सर्वेसर्वा जानते हैं। मगर ये 2,464 लोग कौन हैं जो हम भारत के लोग हैं। सर्वे ही सर्वेसर्वा है और सर्वेसेवा ही देशसेवा है।
2,464 लोगों का मत है कि मोदी जी 10 भारतीय में से 9 में लोकप्रिय हैं। हमारे एक पत्रकार मित्र ज़फ़र ने फेसबुक पर लिखा कि वो दसवां कौन है? क्या वह देशद्रोही है? क्यों न हम सब उस दसवें को देशहित में समझाएं कि भाई तुम भी 9 के साथ मिल लो। अकेले रह कर कुछ तो होगा नहीं तुमसे। इस 9 में तो विरोधी दल के नेता भी आ गए हैं, हमारा यकीन करो, सारी पार्टी के सपोर्टर भी आ गए हैं। पता नहीं तुम किस बात से खुन्नस खा गए मोदी जी से, वरना आज 10 में 10 का स्कोर होता। अभी मेरी बात मान लो वरना मन की बात में मोदी जी तुम दसवें की बात करने लगेंगे। कहने लगेंगे कि भाइयों, ये दसवां कब मानेगा। इसे क्या प्राब्लम है। इसके लिए मैं दीनदयाल दशांश योजना भी चला देता हूं। अमित शाह तो मिशन न लांच कर दें। मिशन टेंथ। जब तक टेंथ हमारे सपोर्ट में नहीं आएगा तब तक हमें और मोदी जी को टेंशन रहेगा।
2,646 का सैंपल हो या 20,000 का सैंपल हो, झलक और झांकी तो मिलती है। सर्वे ग़लत भी होते हैं, सही भी होते हैं। इसलिए उस पर बहस नहीं। मोदी जी लोकप्रिय नेता हैं इसे किसी सर्वे से जानने की ज़रूरत भी नहीं है, अगर है तो बुरा भी नहीं है। मगर समस्या कहीं और है। पीयू रिसर्च ने 40 से अधिक सवालों पर जवाब मांगे हैं। उन जवाबों से इन 2464 लोगों की जो तस्वीर उभरती है, उस पर बात होनी चाहिए। ये लोग मोदी जी के मसले को छोड़ कर बाकी कई चीज़ों पर कंफ्यूज़ लगते हैं। मल्लब ये कहते हैं कि कानून बने तो उसमें चुने हुए प्रतिनिधि वोट न करें। हम नागरिक सीधे वोट कर दें। फिर यही लोग कहते हैं कि वे लोकतंत्र में यकीन भी रखते हैं। भाई, जब कानून भी तुम्हीं को ट्रैफिक जाम में ट्वीट कर बनाना है तो ये एम पी, एम एल ए क्यों चुनने जाते हों। नाखून पर स्याही के निशान के साथ सेल्फी लेने?
आपने देखा होगा कि हवाई जहाज़ से लेकर रेलगाड़ी तक एक्सपर्ट ही चला रहे हैं। क्या आपने देखा है कि सांसद एयर इंडिया का विमान उड़ा रहा है? चीफ इंजीनियर का काम इंजीनियर ही तो कर रहा था, सेना का अध्यक्ष उसमें जीवन बिताने वाला एक्सपर्ट ही तो बनता है, फिर ये कौन से एक्सपर्ट बच गए हैं तो डेमोक्रेसी में चुने हुए प्रतिनिधि से ज़रूरी हो गए हैं? हम भारत के बाकी सवा अरब लोगों अपने इन 2,464 लोगों को समझाओं वरना ये पूरे इंडिया को बौरा देंगे। ये तो तब है जब ये ढाई हज़ार भी पूरे नहीं हैं।
इनमें से 55 फीसदी यानी बहुमत मानता है कि भारत में फैसला लेने के लिए मज़बूत नेता हो, जो संसद और कोर्ट की दखलंदाज़ी के बग़ैर फैसला ले। संसद और कोर्ट की बात जो नहीं मानेगा, आज के फैशन के हिसाब से इन्हें तो देशद्रोही कहा जाना चाहिए मगर लोग ऐसे चिरकुटों की राय का जश्न मना रहे हैं। इतने चुनावों में जीत देकर लोगों ने मोदी जी की लोकप्रियता साबित करने में कोई कमी छोड़ी है क्या, जो ऐसे लोगों की राय पर ख़बरें बन रही हैं।
बीजेपी के नेता और समर्थक कैसे लोगों की राय का जश्न मना रहे हैं। मेरी राय में उन्हें भी इन 2464 लोगों को समझाना चाहिए कि भाई, संसद, कोर्ट को बाइपास करना हमारे मोदी जी के हित में ही नहीं है। ये सब पहले हो चुका होता तो आज मोदी जी प्रधानमंत्री ही नहीं बन पाते। वैसे भी संसद का सत्र हम चुनाव के हिसाब से मैनेज कर लेते हैं तो इसे बाइपास करने की बात क्यों करते हो। संसद होनी चाहिए। गनीमत है कि इन 10 भारतीयों ने यह नहीं कहा कि कोर्ट की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ मज़बूत नेता के लिए बाइपास करने की बात कही। मगर ये 2464 कानून बनाने का सीधा अधिकार अपने पास रखना चाहते हैं, संसद के सदस्यों को नहीं देना चाहते। पीयू को बताना चाहिए कि हमने ऐसे लोगों को चुना है जिन्हें न लोकतंत्र की समझ है और न सैनिक शासन का पता है। इन्हें ले जाकर किसी मिलिट्री ग्राउंड में दस राउंड लगवाना चाहिए तब पता चलेगा कि सैनिक शासन कैसा होता है। यही नहीं दोनों हाथ ऊपर कर बंदूक लेकर दौड़ने से एक ही राउंड में पता चल जाएगा।
नहीं जानने के कारण ही इन 2464 में से 53 फीसदी कहते हैं कि भारत मे सेना का शासन होना चाहिए। इस हिसाब तो आज प्रधानमंत्री की कुर्सी पर जनरल वी के सिंह होते, नरेंद्र मोदी नहीं होते। जब 10 में से आठ भारतीय इस बात से खुश हैं कि जिस तरह से लोकतंत्र चल रहा है वो ठीक है तो उसी 10 में से ये 5 से अधिक भारतीय कौन हैं जो सेना का शासन बेहतर मानते हैं। ये जो 10 भारतीय हैं वो कमाल के हैं। भगवान बचाए इन 10 भारतीयों से।
ये सीरीयस है कि इनके भीतर सैनिक शासन की गुप्त कामना गुप्त रोग की तरह बजबजा रही है। इनसे बात करना ही होगा। इन चिरकुटों को समझाना होगा कि लोकतंत्र नहीं होता तो उनके लोकप्रिय मोदी जी उन्हें नहीं मिलते। सैनिक शासन होगा तो किसी रात पुलिस के लोग आएंगे और उठाकर जेल में दस साल तक बंद कर देंगे। मार देंगे। जिसका न सबूत होगा, न गवाही न न्याय। क्या वे ऐसा सिस्टम चाहते हैं? सैनिक शासन के बाद अगर ये सवाल पूछा गया होता तो इन 2,464 की हालत ख़राब हो जाती। क्या प्रोब्लम है इनकी लाइफ़ में? बाबा रामदेव और श्री श्री रविशंकर का इन्हें कोर्स कराना चाहिए।
इन 2,464 लोगों की बदौलत भारत इस सर्वे में दुनिया के चार मुल्कों में आ सका है जिसके पचास फीसदी से अधिक लोग मानते हैं कि सैनिक शासन होना चाहिए। यह सैंपल बताता है कि भले ही पूरा भारत लोकतंत्र को लेकर कंफ्यूज़ न हो मगर ये 2, 464 पक्का बकलोल हैं। इन्हें लोकतंत्र का मतलब मालूम नहीं है। कोर्ट का काम मालूम नहीं है। संसद की ज़रूर का पता नहीं है। एक नेता को जानते हैं जिनमें इनका खूब विश्वास है। उस विश्वास का आलम यह है कि इनमें से आधे का सैनिक शासन में भी विश्वास है।
अब एक बात गंभीरता से। सर्वे को खारिज मत कीजिए। मगर इसके सवालों के पैटर्न पर ग़ौर कीजिए। पीयू रिसर्च के सवाल शासन करने के लिए संसद, अदालत और निर्वाचित प्रतिनिधियों की हैसियत को कम करते हैं। हम सब जानते हैं कि दुनिया में आर्थिक खाई चौड़ी होती जा रही है। एक प्रतिशत लोगों के पास सारी दुनिया की दौलत है। यही अनुपात अमरीका में भी है और भारत में भी। नेताओं को ख़तरा है कि कहीं 90 फीसदी वंचित जनता उन पर हमला न कर दे। उन्हें सत्ता से बेदखल न कर दे। इसलिए ऐसे सवाल पूछे जाते हैं जिससे लगे कि दुनिया में लोकतांत्रिक संस्थाएं फेल हो गई हैं और अब सैनिक शासन ज़रूरी है। सैनिक शासन इसलिए ज़रूरी है कि इसके ज़रिए आप किसी भी जन विद्रोह को बेहतर तरीके से कुचलते हैं। दबाते हैं। इन सवालों और जवाबों के ज़रिए आप मीडिया और लोगों में एक कृत्रिम आकांक्षा भरते हैं कि सैनिक शासन से ही सब होगा। सैनिक शासन की कल्पना आम नागरिकों के अधिकारों की हत्या की कल्पना है। क्या ये लोग आम लोगों को मरवाना चाहते हैं।
मज़बूत नेता एक मिथक है। मज़बूत नेता के नाम पर उस नेता के भीतर इतनी असुरक्षा भरी होती है दिन भर भावुक मुद्दों की तलाश में रहता है। भावुकता में ही दस बीस साल मुल्क के निकाल देता है और एक दिन भरभरा कर गिर पड़ता है। आप गांधी, अंबेडकर, लिंकन, मंडेला को क्या मज़बूत नेता नहीं मानेंगे जिन्होंने लाखों लोगों का जीवन बदल दिया। एक मुल्क की पहचान बदल दी। लोगों को आवाज़ देकर जान भर दी। जहां जहां एकछत्र राज वाले मज़बूत नेता हुए हैं वहां वहां आम लोगों का अधिकार छिन गया है। चाहे वो कम्युनिस्ट रूस हो या पुतिन का रुस हो। आप चीन से लेकर अमरीका तक अनेक उदाहरणों से इसे देख सकते हैं।
मगर हम सब एक दिन भारत के लोकतंत्र को फेल कर देंगे अगर हम इन 2,464 लोगों की बातों को गंभीरता से लेंगे। एक ही बात ठीक है इनकी कि नरेंद्र मोदी लोकप्रिय नेता हैं और इन्हें लगता है कि लोकतंत्र ठीक चल रहा है। इस पर असहमति ज़ाहिर की जा सकती है मगर ये ख़तरनाक विचार नहीं हैं। ख़तरनाक और विकृत विचार हैं लोकतंत्र पर सैनिक शासन के विचार। इसलिए हे भारत के लोग इन 2, 464 की राय से दूर भागो !

रविश कुमार की रिपोर्ट

Bitcoin क्या है ? बिटकाइन एक नई और डिजिटल मुद्रा है।

बिटकॉइन   
                  बिटकाइन एक नई और डिजिटल मुद्रा है।
कंप्यूटर नेटवर्किंग पर आधारित भुगतान हेतु इसे निर्मित किया गया है। इसका विकास सातोशी नकामोतो नामक एक अभियंता ने किया है। सातोशी का यह छद्म नाम है।

बिटकॉइन
प्रचलित बिटकॉइन लोगो
मूल्यवर्ग
उप इकाई

मिलीबिटकॉइन [1]
एक्स्प्रेशन त्रुटि: अनपेक्षित < ऑपरेटर। 0एक्स्प्रेशन त्रुटि: अनपेक्षित round ऑपरेटर। ×१० −6
माइक्रोबिटकॉइन, बिट [8]
एक्स्प्रेशन त्रुटि: अनपेक्षित < ऑपरेटर। 0एक्स्प्रेशन त्रुटि: अनपेक्षित round ऑपरेटर। ×१० −8
सातोशी [9]
प्रतीक
BTC   मिलीबिटकॉइन [1]
mBTC
 माइक्रोबिटकॉइन, बिट [8]
μBTC
Coins
अव्ययित लेनदेन आउटपुट सातोशी के किसी भी गुणक में मानित
जनसांख्यिकी



जारी होने की तिथि
3 जनवरी 2009; 8 वर्ष पहले

प्रयोक्ता
विश्वव्यापी
जारीकर्ता
प्रशासन
विकेंद्रीकृत
मूल्यांकन
मुद्रास्फीति
12.5 बिटकॉइन प्रति ब्लाक (लगभग हर 10 मिनट पर ) 2020 के मध्य तक, [12] और उसके बाद चार साल अगले अर्धन (हाविंग) तक 6.25 बिटकॉइन प्रति ब्लाक. यह अर्धन 2110–40 तक जारी रहेगा, जब तक 2.1 करोड़ बिटकॉइन जारी हो चुके होंगे

  बिटकॉइन की जानकारी
महत्वपूर्ण तथ्य
1. १- सामूहिक संगणक जाल पर पारस्परिक भुगतान हेतु कूट-लेखन द्वारा सुरक्षित यह एक नवीन मुद्रा है। अंकीय प्रणाली से बनाई गई यह मुद्रा अंकीय पर्स में ही रखी जाती है।
2. २- इसकी शुरुआत ३ जनवरी २००९ को हुई थी।
3. ३- यह विश्व का प्रथम पूर्णतया खुला भुगतान तंत्र है।
4. ४- दुनिया भर में १ करोड से अधिक बिटकाइन हैं, जिनका मूल्य ५५ हज़ार करोड रुपए हैं।
बिटकॉइन एक वर्चुअल यानी आभासी मुद्रा है आभासी मतलब कि अन्य मुद्रा की तरह इसका कोई भोतिक स्वरुप नहीं है यह एक डिजिटल करेंसी है | यह एक ऐसी करेंसी है जिसको आप नातो देख सकते हो और नहीं छु सकते यह केवल इलेक्ट्रॉनिक स्टोर होती है अगर किसी के पास बिटकॉइन है तो वह आम मुद्रा की तरह ही सामान खरीद सकता है
वर्तमान में संसार मे बिटकॉइन काफी लोकप्रिय हो रहा है इसका आविष्कार सातोशी नकामोतो नामक एक अभियंता ने 2008 में किया था और 2009 में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में इसे जारी किया गया था वर्तमान में लोग कम कीमत पर बिटकॉइन खरीद कर ऊंचे दामों पर बेच कर कारोबार कर रहे हैं |
आम डेबिट /क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने में लगभग दो से तीन प्रतिशत लेनदेन शुल्क लगता है लेकिन बिटकॉइन मे ऐसा कुछ नहीं होता है इसके लेनदेन मे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता है इस बजह से भी यह लोकप्रिय होता जा रहा है इसके अलावा यह सुरक्षित और तेज है जिससे लोग बिटकॉइन स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे है किसी अन्य क्रेडिट कार्ड की तरह इसमें कोई क्रेडिट लिमिट नहीं होती है नहीं कोई नगदी लेकर घूमने की समस्या है खरीदार की पहचान का खुलासा किए बिना पूरे बिटकॉइन नेटवर्क के प्रत्येक लेन देन के बारे में पता किया जा सकता है
बिटकॉइन दुनिया का सबसे पहला डिजिटल बिकेंद्रिक्रत करेंसी है यह एकदम सुरक्षित और सुपर फास्ट है और यह दुनिया में कहीं भी कारगर है बिटकॉइन का इस्तेमाल कोई भी कर सकता है किसी योग्यता की जरूरत नहीं है कोई चार्ज नहीं देना पड़ता है और इसकी कोई सीमा भी नहीं है
ऐसे सैकड़ों हजारों वेबसाइट कंपनी है जो बिटकोइन को स्वीकार कर रही हैं प्लेन की टिकट होटल रूम इलेक्ट्रॉनिक्स कार कॉफी और किसी अन्य चीज के लिए भी पेमेंट कर सकते हैं हर साल दुनिया में $1 से लेकर एक मिलियन डॉलर तक इधर से उधर हो जाता है वैसे भी पैसे लेने के लिए हम लोग बैंक और कई कंपनी का सहारा लेते हैं यह सभी कंपनियां हमारे भेजे हुए पैसे को हमारे लोगों तक पहुचाने के लिए अतिरिक्त राशी लेती है और हमें उन पर भरोसा करना पड़ता है वेस्टर्न यूनियन मनी ग्राम और उन जैसी दूसरी कंपनियां की मदद चाहिए होती है मगर इस सुविधा को प्राप्त करने के लिए कोई मंजूरी भी लेनी नहीं पड़ती है आज भी कई लोगो के पास बैंकिंग सुविधा नहीं है लेकिन उन लोगों की संख्या अधिक है जिनके पास इंटरनेट के साथ सेल फोन है और यह इंटरनेट के माध्यम से व्यापार नहीं कर सकते लेकिन अब यह बिटकॉइन की वजह से ऐसा कर सकते हैं क्योंकि बिटकॉइन पर किसी व्यक्ति विशेष सरकार या कंपनी का कोई स्वामित्व नहीं होता है बिटकॉइन करेंसी पर कोई भी सेंट्रलाइज कंट्रोलिंग अथॉरिटी नहीं है आज बिटकॉइन काफी पॉपुलर है इसे शक्ति उन हजारों लोगों से मिलती है जिनके पास विशेष कंप्यूटर है जो नेटवर्क को शक्ति संपन्न बनाते हैं नेट पर विनिमय को सुरक्षित करते हैं और लेनदेन की जांच करते हैं इसे माइनिंग कहा जाता है

बिटकॉइन माइनिंग

आम भाषा मे माइनिंग का मतलव ये होता है की खुदाई के द्वारा खनिजो को निकालना जैसे की सोना कोयला आदि की माइनिंग चूकि बिटकॉइन का कोई भोतिक रूप तो है नहीं तो इसकी माइनिंग परंपरागत तरीके से तो नहीं हो सकती इसकी माइनिंग मतलव की बिटकॉइन का निर्माण करना होता है जो की कंप्यूटर पर ही संभव है अर्थात बिटकॉइन को कैसे बनाएं नई बिटकॉइन बनाने के तरीके को बिटकॉइन माइनिंग कहा जाता है
बिटकॉइन माइनिंग का मतलब एक ऐसी प्रोसेस है जिसमें कंप्यूटिंग पावर का इस्तेमाल कर ट्रांजैक्शन ट्रांजैक्शन प्रोसेस किया जाता है, नेटवर्क को सुरक्षित रखा जाता है साथ ही नेटवर्क को सिंक्रोनाइज भी किया जाता है यह एक बिट कंप्यूटर सेंटर की तरह है पर यह डी सेंट्रलाइज सिस्टम है जिससे कि दुनिया भर में स्थित माइनरस कंट्रोल करते हैं माइनरस बो होते हैं जो माइनिंग का कार्य करते हैं अर्थात जो बिटकॉइन बनाते हैं अकेला एक इंसान माइनिंग को कंट्रोल नहीं कर सकता| बिटकॉइन बिटकॉइन माइनिंग की सफलता का ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने पर जो पुरस्कार मिलता है वह बिटकॉइन होता है | बिटकॉइन माइनरस को माइनिंग के लिए एक इस्पेशल हार्डवेयर या कहें तो एक शक्तिशाली कंप्यूटर जिसकी पप्रोसेसिंग तीव्र हो की आवश्यकता होती है इसके अलावा बिटकॉइन माइनिंग सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है माइनरस अगर ट्रांजैक्शन को कंप्लीट कर लेते हैं तो उन्हें ट्रांजैक्शन फीस मिलती है यह ट्रांजैक्शन फीस बिटकॉइन के रूप में ही होती है एक नई ट्रांजैक्शन को कंफर्म होने के लिए उंहें ब्लॉक में शामिल करना पड़ता है उसके साथ एक गणितीय प्रणाली होती है उससे हल करना होता है कि जो की बहुत कठिन होता है जिसकी पुष्टि करानी होता है प्रूफ करने के लिए आपको लाखों कैलकुलेशन प्रति सेकंड करनी पड़ेगी उसके बाद ही ट्रांजैक्शन कंफर्म होगा | जैसे जैसे माइनरस हमारे इस नेटवर्क से जुड़ेंगे तो उन्हें माइनिंग करने के लिए रिक्त ब्लाक खोजने का तरीका और भी कठिन हो जाएगा |
माइनिंग का काम वही लोग करते हैं जो जिनके पास के पास विशेष गणना वाले कंप्यूटर और गणना करने की उचित क्षमता हो ऐसा नहीं होने पर माइनरस केवल इलेक्ट्रिसिटी ही खर्च करेगा और अपना समय बर्बाद करेगा |
बिटकॉइन के माइनिंग का प्रमुख उद्देश है बिटकॉइन नोड को सुरक्षित बनाना और नेटवर्क को छेड़छाड़ से दूर रखना |
माइनिंग के द्वारा ने राशि लगभग 25 से 30 बिटकॉइन कमाए जा सकते है जिसकी कीमत भारतीय मुद्रा मे लाखो मे होती है |
वर्तमान में यह सभी भौतिक मुद्राओ से कही अधिक मूल्यवान मुद्रा बन चुकी है |

Thursday, November 16, 2017

बुलेट ट्रेनः क्या पीएम मोदी ने देश की जनता से झूठ बोला, सूचना के अधिकार में हुआ खुलासा

डेस्क- क्या केंद्र की मोदी सरकार देश की जनता से झूठ बोला कि जल्द भारत में बुलेट ट्रेन दौड़ेगी! क्या बुलेट ट्रेन भी महज एक हसीन सब्जबाग था 15 लाख के जुमले की तरह।
बहरहाल सूचना के अधिकार से मिली जानकारी पर यकीन किया जाए तो महसूस हो रहा है कि जापान के सहयोग से जिस बुलेट ट्रेन को भारत में दौड़ने के हसीन ख्वाब मोदी सरकार दिखा रही थी वो खालिस झूठ था।
दरअसल जूनागढ़ के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से जापानी सहयोग से दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन के बारे मे जानकारी चाही तो पता चला कि सितंबर के महीने जापानी प्रधानमंत्री ने ऐसे किसी भी एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं जो भारत में मोदी सरकार के बुलेट ट्रेन की नीव को पुख्ता करे।
विदेश मंत्रालय में जपानी प्रभाग को देखने वाली डिप्टी सेक्रेटरी निहारिका सिंह की ओर से 13 अक्टूबर 2017 को जारी सूचना में अतुल को इस बात की जानकारी दी गई कि इसी साल सितंबर महीने में जो जपानी प्रधानमंत्री शिंजे आबे का दौरा हुआ था उसमे भारत सरकार के साथ उन्होंने बुलेट ट्रेन के बारे में कोई लिखित और प्रमाणिक करार नहीं किया था।

ऐसे में पीएम मोदी जापान के सहयोग से जिस बुलेट ट्रेन को हिंदुस्तान में दौड़ाने की बात कर रहे हैं उसका काम किस स्तर पर कहां और किन कागज़ात चल रहा है इसका पता विदेश मंत्रालय के जापनी प्रभाग को नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उस वक्त जो बुलेट ट्रेन के लिए बेहद कम ब्याज दर के लोन की बात केंद्र सरकार की ओर से हो रही थी वो झूठ थी। सवाल ये भी है कि क्या आज तक किसी पीएम ने देश की जनता को गरिमामय पद पर बैठ कर गुमराह किया है।

मतलब साफ है कि भारत में बुलेट ट्रेन और इसके लिए जापान से बेहद कम ब्याज के लोन की बात महज पीएम मोदी का जुमला था। जिसका हकीकत से कोई लेना देना नहीं।

यशवंत सिन्हा ने पीएम मोदी पर फिर साधा निशाना : बोले - सात सौ साल पहले तुगलक ने भी की थी नोटबंदी

मोदी सरकार की आलोचना से गुस्साए भाजपा प्रवक्ता, बोले- यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा पार्टी से निकल जाएं

नोटबंदी के फैसले को लेकर पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना तुगलक से की है. उन्होंने कहा है कि 14वीं सदी के दिल्ली सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक ने भी 700 साल पहले नोटबंदी की थी. इस विवादित कदम के लिए मोदी की आलोचना करते हुए सिन्हा ने कहा कि नोटबंदी ने देश की अर्थ व्यवस्था को 3.75 लाख करोड रपये का नुकसान पहुंचाया है.

यइन दिनों यशवंत सिन्हा लगातार मोदी सरकार की आलोचना कर रहे हैं और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा तो हमेशा से मोदी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते रहे हैं। दो मुखर नेताओं की आलोचना भाजपा सह नहीं पा रही है।

यशवंत सिन्हा का जेटली पर हमला : आर्थिक मोर्चे पर कितनी मुश्किलों में घिर गयी है मोदी सरकार? उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि बहुत सारे ऐसे शंहशाह (राजा) हुए हैं, जो अपनी मुद्रा लेकर आये. कुछ ने नयी मुद्रा को चलन में लाने के साथ-साथ पहले वाली मुद्रा का भी चलन जारी रखा, लेकिन 700 साल पहले एक शहंशाह मोहम्मद बिन तुगलक था, जो नई मुद्रा लेकर आया और पुरानी मुद्रा के चलन को समाप्त कर दिया. इसके पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने बीते 26 सितंबर को वित्त मंत्री अरुण जेटली पर आर्थिक मोर्चे पर विफल होने का आरोप लगाया था. उस समय उनके इस बयान के बाद न केवल भाजपा में बल्कि पूरी भारतीय राजनीति में उबाल आ गया था. उस समय उन्होंने कहा था कि अपने कार्य प्रदर्शन को लेकर अब तक सवालों से बेपरवाह नरेंद्र मोदी सरकार को लगभग साढ़े तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद सबसे कठिन चुनौतियों और सवालों से जूझना पड़ रहा है. यह सवाल घरेलू व बाहरी दोनों मोर्चों पर ताबड़तोड़ किये जा रहे हैं. उन्होंने कहा था कि नोटबंदी पर संसद में चर्चा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री व देश में उदारवाद के जनक डाॅ मनमोहन सिंह का वह बयान हर कोई याद कर रहा है, जिसमें उन्होंने अपना अनुमान पेश करते हुए कहा था कि जीडीपी में दो प्रतिशत तक कमी आने की आशंका है.

इसीलिए भाजपा तेलंगाना के प्रवक्ता कृष्ण सागर राव ने यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा को पार्टी से इस्तीफा दे देने के लिए कहा है।
आलोचना की मंशा पर सवाल उठाते हुए भाजपा प्रवक्ता कहते हैं कि अगर इन दोनों नेताओं को मोदी सरकार से इतनी समस्या है और सरकार की गवर्नेंस रास नहीं आ रही है तो इन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि पार्टी के खिलाफ बयानबाजी में इन्होंने लक्ष्मण रेखा पहले ही पार कर दी है।
गौरतलब है कि इन दिनों पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा मोदी सरकार को तमाम मुद्दों पर घेर रहे हैं। अभी हाल ही में वित्त मंत्री अरुण जेटली की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था कि जीएसटी अगर इतना ही अच्छा है तो रोज उसमें बदलाव क्यों करने पड़ रहे हैं। साथ ही उन्होंने जीएसटी को लोगों के ऊपर बोझ बताया था।
अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा को ‘वन मैन शो’ और ‘टू मैन आर्मी’ कहा था।
इन दिनों यशवंत सिन्हा लगभग हर मोर्चे पर मोदी सरकार को घेर रहे हैं और जमकर आलोचना कर रहे हैं। इस पर भाजपा प्रवक्ता कृष्ण सागर राव कहते हैं ‘उनको सरकार में भागीदारी नहीं मिल रही है इसलिए ऐसी टिप्पणियां कर रहे हैं नहीं तो चुनावी सीजन में ही वह इस तरह की बातें क्यों उठा रहे हैं।
जब कहीं चुनाव होने लगता है तो यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा इस तरह की टिप्पणियां देने लगते हैं, चाहे वह बिहार का चुनाव हो या उत्तर प्रदेश का या हिमाचल का या फिर अब गुजरात का।’