Thursday, January 4, 2018

घर बैठे मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ने की लिए बस यूँ ही एक बार फोन करे..

आज से आपकों मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करवाने के लिए रिटेल शॉप के चक्कर नहीं काटने होगे।




सरकार ने सिम कार्ड को आधार नंबर से जोड़ने की प्रक्रिया की आखिरी तारीख ज़रूर टाल दी है, लेकिन वैरिफिकेशन तो अब भी ज़ारी है अच्छी खबर यह है कि मंगलवार को यह प्रक्रिया आसान बना दी गई. अब सभी टेलीकॉम सब्सक्राइबर सिर्फ एक नंबर पर कॉल करके अपने सभी मोबाइल नंबर को आधार से वैरिफाई कर सकते हैं, चाहे नेटवर्क कोई भी हो. यह खबर राहत की सांस लेकर आई है, क्योंकि अब तक ग्राहक अपने मोबाइल नंबर को आधार नंबर से जोड़ने के लिए टेलीकॉम कंपनियों के ऑफलाइन स्टोर में जाने के लिए मजबूर थे. अब ग्राहक आईवीआर सेवा का इस्तेमाल करके अपने घर से ही मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ सकते हैं.

Tuesday, January 2, 2018

स्टेट बैंक ने आपकी ग़रीबी पर ज़ुर्माना वसूला 1771 करोड़

स्टेट बैंक आफ इंडिया ने अप्रैल से नवंबर 2017 के बीच उन खातों से 1771 करोड़ कमा लिया है,जिनमें न्यूनमत बैलेंस नहीं था। यह डेटा वित्त मंत्रालय का है। न्यूनतम बैलेंस मेट्रो में 5000 और शहरी शाखाओं के लिए 3000 रखा गया है।

स्टैट बैंक आफ इंडिया ने जुलाई से सितंबर की तिमाही में 1581 करोड़ की वसूली की थी। यह पैसा बैंक की दूसरी तिमाही के मुनाफे से भी ज़्यादा है।
स्टेट बैंक के पास 42 करोड़ बचत खाताधारक हैं। इनमे से 13 करोड़ बेसिक बचत खाते और जनधन योजना के तहत खुले खातों से न्यूनतम बचत न होने का जुर्माना नहीं लिया गया। उन्हें मुक्त रखा गया।
29 करोड़ बचत खाताधारकों में ज़रूर ऐसे रहे होंगे जो अपने खाते में न्यूनतम बचत नहीं रख पाते होंगे, इसका संबंध उनकी आर्थिक स्थिति से ही होगा। इनके खाते से 100-50 काटते काटते बैंक ने 1771 करोड़ उड़ा लिए। अगर इनके पास पैसा होता तो क्यों ये कम रखते। ज़ाहिर है रखते ही।

मगर इस कमज़ोर आर्थिक स्थिति में भी बैंक ने उनसे जुर्माना वसूला। ये एक किस्म का चंपारण का तीन कठिया सिस्टम है जिसके तहत किसानों को अपने खेत के तीन हिस्से में नील की खेती करनी ही होती थी ताकि नील के मैनेजरों का मुनाफा और बढ़ सके।
स्टैट बैंक आफ इंडिया पर एनपीए का बोझ सबसे ज़्यादा है। बैंक की हालत खस्ता है। वह उन लोगों से जुर्माना नहीं वसूल नहीं पा रहा जो उसके लाख करोड़ से भी ज़्यादा लोन लेकर चंपत हो चुके हैं आपकी नासमझी का लाभ उठाकर इस देश में नौटंकी हो रही है।

एनपीए के बाद नोटबंदी ने बैंकों को भीतर से कमज़ोर कर दिया है। बैंक ने खुद को बचाने के लिए कमज़ोर लोगों की जेब काट ली। गला काट लिया। आप चुप रहिए। सिसकते रहिए और अपनी मेहनत कमाई से बैंक को 1771 करोड़ देते रहिए।
इंडियन एक्सप्रेस ने यह ख़बर छापी है। स्टेट बैंक की हिम्मत देखिए, जवाब तक नहीं दिया है। कर क्या लोगो, ख़बर छाप लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा। यह संवेदनशीलता है उन बैंकों की जहां हम पैसे के साथ अपना भरोसा जमा करते हैं। सबको पता है कि टीवी आपको पाकिस्तान और तीन तलाक में उलझा कर रखे हुए हैं और इधर चुपके से आपकी जेब कतरी जा रही है।

हमने इस ख़बर के बाद एक हिन्दी अख़बार को चेक किया। उसके पहले पन्ने पर स्टेट बैंक की ख़बर थी। कि बैंक ने होम लोन पर ब्याज़ दर कम कर दिया है। गृह ऋण सस्ता हुआ। लेकिन आपका ही पैसा आपके खाते से कट गया, उसकी कोई ख़बर नहीं है। आपको अखबार गृह ऋण के जश्न में उलझा कर मूर्ख बना रहे हैं। अख़बार ख़रीदने से अख़बार पढ़ना नहीं आता है। पढ़ना सीखें। हिन्दी अख़बारों की चतुराई से सावधान रहिए।

पंजाब नेशनल बैंक ने भी इस ज़बरन वसूली से 97.34 करोड़ कमाए हैं। सेंट्रल बैंक ने 68.67 करोड़ और कैनरा बैंक ने 62.16 करोड़ कमाए हैं। पंजाब और सिंध बैंक ने इस तरह का जुर्माना नहीं लिया है। वह ऐसा करने वाला एकमात्र बैंक है।

खाते में कम पैसा होने का जुर्माना वसूला जा रहा है। आप नगद लेन देन न कर पाए इसके लिए जबरन रास्ते बंद किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि जितना भी पैसा है, बैंक में रखिए। जब आप बैंक में रखते हैं तो कहा जाता है कि कम रखा है, चलो अब जुर्माना भरो। ज़्यादा रखेंगे तो ब्याज़ कम दिया जाएगा। आप देखिए कि आप अपनी आर्थिक स्वतंत्रता गंवा रहे हैं या पा रहे हैं? क्या ग़रीब होने का जुर्माना लगेगा अब इस देश में?

Dissimilar:// यह रिपोर्ट रवीश कुमार के कस्बा नामक ब्लाग से लिया गया है 

Monday, December 25, 2017

अपने बयानों के अक्सर विवादों में रहने वाले भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़ा ही संगीन आरोप लगाया है। क्या बागी हो चुके हैं BJP नेता सुब्रमण्यम स्वामी, अपनी पार्टी के खिलाफ दिया ये बयान...

अपने बयानों के अक्सर विवादों में रहने वाले भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़ा ही संगीन आरोप लगाया है।

भाजपा नेता और राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी उन नेताओं में शुमार हैं जो सच बोलते समय अपनों का भी ख्याल नहीं रखते हैं। स्वामी ने अपनी ही पार्टी बेजीपी पर निशाना साधते हुए सनसनीखेज खुलासा किया है। स्वामी ने केंद्र सरकार पर केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के अधिकारियों पर बेहतर आर्थिक आंकड़े देने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

स्वामी का आरोप है कि केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) ने GDP के जो बेहतरीन आंकड़े जारी किए थे, दरअसल वे मोदी सरकार के दबाव का परिणाम थे। ताकि देश में यह संदेश जाए कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था और जीडीपी विकास दर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक यह गंभीर आरोप स्वामी ने शनिवार को गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को संबोधित करते हुए लगाया। इस दौरान स्वामी ने कहा कि सीएसओ के आला अधिकारियों पर जीडीपी के अच्छे आंकड़े दिखाने का दबाव था।

स्वामी ने कहा, 'आप लोग कृपया करके जीडीपी के तिमाही आंकड़ों पर ना जाएं, ये सब फर्जी हैं। मैं बताया चाहूंगा कि मेरे पिताजी ने सीएसओ की स्थापना की थी।'
ऐसा इसलिए क्योंकि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था और जीडीपी पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है, ये आम लोगों को दिखाया जा सके। स्वामी ने खुलकर सीएसओ के आंकड़ों को फर्जी बताया।

इतना ही नहीं सुब्रमण्यम स्वामी में तमिलनाडु के आर के नगर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को एक चौथाई नोटा वोट मिलने पर भी सवाल खड़ा किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते बीजेपी की जवाबदेही बनती है।

भले सुब्रमण्यम स्वामी के बयान को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा हो। बावजूद एक जिम्मेदार व्यक्ति के इन आरोपों पर विपक्ष के नेता जांच करवाए जाने की मांग करने लगे हैं।

भाजपा सांसद ने आगे कहा, 'मैं हाल ही में केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा के साथ सीएसओ गया था। गौड़ा ने सीएसओ के अधिकारी को तलब किया। ऐसा इसलिए क्योंकि नोटबंदी के बाद अच्छे आंकड़े पेश करने का दबाव था। इस वजह से ऐसे आंकड़े जारी किए गए ताकि लगे कि नोटबंदी का कोई प्रभाव नहीं हुआ।'

स्वामी यहीं पर नहीं रूके। उन्होंने कहा, मैं बेचैन महसूस कर रहा था। क्योंकि मुझे पता था कि नोटबंदी का प्रभाव तो पड़ा है।' इसके साथ ही स्वामी ने आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए।

कार्यक्रम में उन्होंने विदेशी रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट पर भी सवालिया निशान लगाया। उन्होंने कहा, 'आप लोग इन मूडी और फिच की रिपोर्ट्स पर भरोसा नहीं करना। इन्हें तो पैसे देकर किसी भी तरह की रिपोर्ट तैयार करवा सकते हैं।'

Tuesday, December 19, 2017

Social media making life easier than interested

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  Ankit Yadav  
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Friday, December 1, 2017

आधार को मोबाइल नंबर से लिंक करने का प्रोसेस हुआ ऑनलाइन, इस तरह करे

आज से आपकों मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करवाने के लिए रिटेल शॉप के चक्कर नहीं काटने होगे। देश की सभी कंपनियों ने अपनी वेबसाइट पर सर्विस को शुरू कर दिया है। जिसके तहत आप घर बैठे अपने मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करवा सकेंगे।

लैपटॉप और डेस्कटॉप के इस्तेमाल से आप मोबाइल को आधार से लिंक कर सकते है। पुराने नंबर को अपडेट करने के लिए पहले आपकों यूआईएडीएआई की वेबसाइट पर जाना होगा। उसके बाद वहां पर आधार अपडेट का आप्शन दिया होगा, उस पर क्लिक करके आपको आधार के सेल्फ सर्विस पोर्टल पर रिडायरेक्ट कर दिया जाएगा। जिसके बाद आपको अपना आधार नंबर देना होगा और कैप्चा कोड डालकर ओटीपी आपके नंबर पर आएगा। इसके बाद आपको मोबाइल नंबर अपडेट फील्ड में जाकर के नया मोबाइल नंबर देना होगा। जिसके बाद आपका नंबर आधार से रजिस्टर होने के बाद पुष्टि हो जाएगी।

इसके साथ ही आपको बता दे कि अगर आपके पास दो अलग-अलग सिम है। तो इसे वेरिफाई करवाने के लिए भी आपको साइट पर जाकर नंबर भरना होगा। फिर आपको ओटीपी डालना होगा। इसके बाद वेबसाइट पर एक कनसेंट मैसेज आएगा, जिसके बाद आपको अपना आधार नंबर डालना है। आधार नंबर देने के बाद कंपनी यूआईएडीएआई को ओटीपी भेजने के लिए गुजारिश करेगा। यूआईएडीएआई फिर उस आधार नंबर पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी को भेजेगा। इसके बाद मोबाइल उपभोक्ताओं को उनकी ई-केवाईसी डिटेल दिखाई जाएगीं और ओटीपी को सबमिट करने के लिए कहा जाएगा। फिर आपका नंबर वैरिफाइ हो जाएगा।