Sunday, October 8, 2017

यहां देखिए कैसा है विकास: अमित शाह के बेटे का 16 हज़ार गुना विकास हुआ!

केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ-साथ पार्टी के लगभग सभी नेताओं ने देश के विकास के संबंध में बड़े-बड़े वादे किए, जिसस पर आगे बढ़ते हुए सरकार दिन प्रति दिन नए आयाम छूने की दावे भी करती है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कुछ ऐसी जानकारी सामने आ रही है, जिससे आप समझ सकते है कि सही मायने में विकास क्या होता है।

दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स में रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज यानी ROC के हवाले से बताया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और अमित शाह के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद अमित शाह के बेटे जय अमितभाई शाह के स्वामित्व वाली कंपनी का कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहा है। आकड़ों के अनुसार तब से अब तक जय अमितभाई शाह की कारोबार में 16 हज़ार गुना विकास हुआ है।
बता दें कि इस रिपोर्ट को लेकर दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी मोदी सरकार और बीजेपी पर हमला करते हुए ट्वीट किया है कि “अमित शाह के बेटे जय शाह की कम्पनी का 16 हज़ार गुना विकास हुआ, भारत माता की जय NO Question PLZ”।

दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कहा जा रहा है कि कंपनी बैलेंस शीट और आरओसी से प्राप्त वार्षिक रिपोर्ट से पता चलता है कि मार्च 2013 और 2014 के समाप्त होने वाले वित्तीय वर्षों में, शाह की मंदिर एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड ने क्रमशः 6,230 रुपये और 1,724 रुपये की हानि की है। जबकि 2014-15 में, 2015-16 में 80.5 करोड़ रुपये के टर्नओवर में कूदने से पहले ही 50,000 रुपये के राजस्व पर 18,728 रुपये का लाभ हुआ।

बताया जा रहा है कि मंदिर एंटरप्राइज की आमदनी में आश्चर्यजनक वृद्धि उस समय हुई जब फर्म को राजेश खांडवाला की एक वित्तीय सेवा फर्म से 15.78 करोड़ रुपये का असुरक्षित ऋण मिला था, जो एक राज्यसभा सांसद और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के शीर्ष कार्यकारी समीर नथवानी है।

रामदेव, अन्ना और श्री श्री पर अटलजी की भतीजी का संगीन आरोप..

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अन्ना हजारे, बाबा रामदेव और श्री श्री रविशंकर पर भाजपा और संघ का एजेंट होने का आरोप लगाया है। गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए करुणा कांग्रेस नेता और अटल जी की भतीजी करुणा शुक्ला ने कहा कि देश के जिन भी राज्यों में भाजपा की सरकार है वहां हालत काफी खराब है। आने वाले समय में भाजपा को किसी भी चुनाव में जीत हासिल नहीं होगी। इन राज्यों में अपनी स्थिति को भांपने के बाद ही भाजपा ने इन रामदेव, अन्ना हजारे और श्री श्री को भेजना शुरू कर दिया है।

अन्ना खुद का मूल्यांकन करें

संघ पर बड़ा हमला बोलते हुए करुणा ने कहा कि गांधी टोपी पहनकर गांधी के हत्यारों का साथ देने वाले अन्ना हजारे खुद का मूल्यांकन करें, वह आखिर तब ही भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन क्यों करते हैं जब यूपीए की सरकार सत्ता में होती है, जब भी भाजपा की सरकार आती है तो वह चुप्पी साध लेते हैं और उपदेश देने लगते हैं, वह कहते हैं कि जनता खुद से आंदोलन करेगी।
आरएसएस के एजेंट हैं ये लोग
लोकपाल बिल के बारे में करुणा ने कहा कि यूपीए सरकार को हटाने के लिए ही इसके लिए आंदोलन शुरू किया गया था। इसीलिए उस वक्त दिग्विजय सिंह ने कहा था कि यह आरएसएस का षड़यंत्र है, लेकिन उस वक्त किसी ने भी इस बात को स्वीकार नहीं किया था। जबकि बाद में खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इस बात को स्वीकार किया था कि अन्ना व बाबा रामदेव के इस आंदोलन को आरएसएस का समर्थन प्राप्त था। यही नहीं धरनास्थल पर आरएसएस के लोग मौजूद थे।

आप पर भी उठाया सवाल

आम आदमी पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए करुणा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी भी उन्हीं राज्यों में चुनाव लड़ने उतरती हैं जहां भाजपा कमजोर है, ऐसे में ये लोग भाजपा को ही लाभ पहुंचा रहे हैं। यही नहीं विवेकानंद फाउंडेशन पर भी सवाल खड़ा करते हुए करुणा ने कहा कि विवेकानंद फाउंडेशन आरएसएस के विवेकानंद केंद्र के द्वारा ही गठित किया गया है, जिसमें आरएसएस के कई आला नेता सक्रिय हैं।


Karuna Shukla says Baba Ramdev, Anna Hazare and Ravishankar are RSS agent |

Saturday, October 7, 2017

कुछ हफ्तों में बंद हो जाएंगे इस मोबाइल कंपनी के नंबर? सरकार की दी गई जानकारी..

वर्तमान में टाटा टेलिसर्विसेज के कुल 4.5 करोड़ सबस्क्राइबर्स हैं। भारतीय टेलीकॉम मार्केट में कंपनी की हिस्सेदारी 4 फीसदी की है।

  
कुछ हफ्तों में बंद हो जाएंगे इस मोबाइल कंपनी के नंबर? सरकार की दी गई जानकारी
देश की दिग्गज कारोबारी समूह टाटा अपने टेलिकॉम बिजनेस को समेटने की तैयारी कर रही है। टाटा समूह ने शनिवार को अधिकारिक तौर पर ट्वीट करके भारत सरकार/ डीओटी को सूचित किया है कि वह टाटा टेलीसर्विसेज (टाटा डोकोमो) को बंद करने जा रही है। कंपनी ने बताया है कि टेलिकॉम सर्विसेज को बंद करने की तैयारी शुरु हो चुकी है। संभव है कि अगले हफ्ते में वह टाटा डोकोमो की स्थायी सेवा बंद कर दे। वहीं कंपनी सूत्रों की माने तो टाटा समूह की टेलीकॉम सर्विसेज यूनिट लंबे समय से घाटे में चल रही है। इस यूनिट को बेचने में असफल रहने के बाद चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन अब इस कारोबार को समेटने पर ही विचार कर रहे हैं।

टाटा टेलिसर्विसेज समूह की पहली ऐसी कंपनी होगी, जो 149 सालों के इतिहास में बंद होगी। यदि यह टेलिकॉम कंपनी बंद होती है तो टाटा समूह की बैलेंस शीट पर गहरा असर पड़ेगा। समूह की इस कंपनी पर 34,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। यही नहीं कंपनी को कर्ज देने वाली संस्थाएं भी अब रकम वसूली के लिए दबाव बना रहे हैं। संभवत: यह पहला मौका है, जब टाटा समूह की कोई कंपनी इस तरह के संकट में फंसी है।


वर्तमान में टाटा टेलिसर्विसेज के कुल 4.5 करोड़ सबस्क्राइबर्स हैं। भारतीय टेलीकॉम मार्केट में कंपनी की हिस्सेदारी 4 फीसदी की है। हालांकि कंपनी यदि अपने टेलिकॉम स्पेक्ट्रम को बेचती है तो उसे अपने कर्ज को घटाने में कुछ मदद मिलेगी। बता दें कि हाल ही में कंपनी की भारती एयरटेल और रिलायंस जियो से बातचीत चल रही थी, लेकिन आखिर में कोई नतीजा नहीं निकला। कंपनी के जापानी साझेदार डोकोमो की ओर से हाथ खींचे जाने के बाद से विकल्पों पर विचार चल रहा है। डोकोमो की टाटा टेलिसर्विसेज में 26 फीसदी की हिस्सेदारी थी। हालांकि, कंपनी ने ट्वीट में साफ किया है कि डोकोमो के बंद होने में उसके सबस्क्राइबर्स को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी। उनको सेवा मिलता रहेगा।

Friday, September 15, 2017

पेट्रोल की कीमत को लेकर पीएम मोदी का ट्वीट हुआ वायरल

नई दिल्ली पेट्रोल की कीमत आसमान छू रही है, सोशल मीडिया पर सरकार की जमकर फजीहत हो रही है लेकिन बीजेपी अपने गुमान में मशगूल है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 80 रुपए प्रति लीटर पहुंच चुकी है। नई दिल्ली में भी पेट्रोल की कीमत रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर तमाम प्रतक्रियाएं आ रही है। #petrolpricehike ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।

नरेंद्र मोदी ने किया था ट्वीट



ऐसे में पीएम मोदी का एक पुराना ट्वीट तेजी से वायरल हो रहा है जब वे देश के प्रधान सेवक के बजाए गुजरात के मुख्य सेवक हुआ करते थे। केंद्र में UPA-2 की सरकार थी। पेट्रोल की कीमत को लेकर नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया था कि पेट्रोल की कीमत में बेतहासा वृद्धि UPA-2 सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है। पेट्रोल की इतनी ज्यादा कीमत से गुजरात की जनता पर सैकड़ों करोड़ों का बोझ पड़ेगा। मेगा स्टार अमिताभ बच्चन ने भी उस वक्त एक ट्वीट किया था।
कांग्रेस ने कहा आर्थिक आतंकवाद

वर्तमान की बात करें तो देश में डेली फ्यूल प्राइस रिवीजन की व्यवस्था लागू है। मतलब पेट्रोल और डीजल की कीमत इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत के आधार पर तय होती है। कांग्रेस ने इस आर्थिक आतंकवाद करार दिया है। बता दें 26 मई 2014, मोदी के सत्तासीन होने के बाद से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत 52 फीसदी तक कम हो चुकी है। उस समय मुंबई में पेट्रोल की कीमत 71.41 रुपए थी जबकि आज की कीमत 79.48 पैसे हैं।

असफल योजनाओं की सफल सरकार, अबकी बार ईवेंट सरकार- रवीश कुमार

2022 में बुलेट ट्रेन के आगमन को लेकर आशावाद के संचार में बुराई नहीं है। नतीजा पता है फिर भी उम्मीद है तो यह अच्छी बात है। मोदी सरकार ने हमें अनगिनत ईवेंट दिए हैं। जब तक कोई ईवेंट याद आता है कि अरे हां, वो भी तो था,उसका क्या हुआ, तब तक नया ईवेंट आ जाता है। सवाल पूछकर निराश होने का मौका ही नहीं मिलता। जनता को आशा-आशा का खो-खो खेलने के लिए प्रेरित कर दिया जाता है। प्रेरना की तलाश में वो प्रेरित हो भी जाती है। होनी भी चाहिए। फिर भी ईमानदारी से देखेंगे कि जितने भी ईवेंट लांच हुए हैं, उनमें से ज़्यादातर फेल हुए हैं। बहुतों के पूरा होने का डेट 2019 की जगह 2022 कर दिया गया है। शायद किसी ज्योतिष ने बताया होगा कि 2022 कहने से शुभ होगा। ! काश कोई इन तमाम ईवेंट पर हुए खर्चे का हिसाब जोड़ देता। पता चलता कि इनके ईवेंटबाज़ी से ईवेंट कंपनियों का कारोबार कितना बढ़ा है।

ठीक है कि विपक्ष नहीं है, 2019 में मोदी ही जीतेंगे, शुभकामनाएं, इन दो बातों को छोड़ कर तमाम ईवेंट का हिसाब करेंगे तो लगेगा कि मोदी सरकार अनेक असफल योजनाओं की सफल सरकार है। इस लाइन को दो बार पढ़िये। एक बार में नहीं समझ आएगा।
2016-17 के रेल बजट में बड़ोदरा में भारत की पहली रेल यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव था। उसके पहले दिसंबर 2015 में मनोज सिन्हा ने वड़ोदरा में रेल यूनिवर्सिटी का एलान किया था। अक्तूबर 2016 में खुद प्रधानमंत्री ने वड़ोदरा में रेल यूनिवर्सिटी का एलान किया। सुरेश प्रभु जैसे कथित रूप से काबिल मंत्री ने तीन साल रेल मंत्रालय चलाया लेकिन आप पता कर सकते हैं कि रेल यूनिवर्सिटी को लेकर कितनी प्रगति हुई है।
इसी तरह 2014 में देश भर से लोहा जमा किया गया कि सरदार पटेल की प्रतिमा बनेगी। सबसे ऊंची। 2014 से 17 आ गया। 17 भी बीत रहा है। लगता है इसे भी 2022 के खाते में शिफ्ट कर दिया गया है। इसके लिए तो बजट में कई सौ करोड़ का प्रस्ताव भी किया गया था।

2007 में गुजरात में गिफ्ट और केरल के कोच्ची में स्मार्ट सिटी की बुनियाद रखी गई। गुजरात के गिफ्ट को पूरा होने के लिए 70-80 हज़ार करोड़ का अनुमान बताया गया था। दस साल हो गए दोनों में से कोई तैयार नहीं हुआ। गिफ्ट में अभी तक करीब 2000 करोड़ ही ख़र्च हुए हैं। दस साल में इतना तो बाकी पूरा होने में बीस साल लग जाएगा।
अब स्मार्ट सिटी का मतलब बदल दिया गया है. इसे डस्टबिन लगाने, बिजली का खंभा लगाने, वाई फाई लगाने तक सीमित कर दिया गया। जिन शहरों को लाखों करोड़ों से स्मार्ट होना था वो तो हुए नहीं, अब सौ दो सौ करोड़ से स्मार्ट होंगे। गंगा नहीं नहा सके तो जल ही छिड़क लीजिए जजमान।

गिफ्ट सिटी की बुनियाद रखते हुए बताया जाता था कि दस लाख रोज़गार का सृजन होगा मगर कितना हुआ, किसी को पता नहीं। कुछ भी बोल दो। गिफ्ट सिटी तब एक बडा ईवेंट था, अब ये ईंवेट कबाड़ में बदल चुका है। एक दो टावर बने हैं। जिसमें एक अंतर्राष्ट्रीय स्टाक एक्सचेंज का उदघाटन हुआ है। आप कोई भी बिजनेस चैनल खोलकर देख लीजिए कि इस एक्सचेंज का कोई नाम भी लेता है या नहीं। कोई 20-25 फाइनेंस कंपनियों ने अपना दफ्तर खोला है जिसे दो ढाई सौ लोग काम करते होंगे। हीरानंदानी के बनाए टावर में अधिकांश दफ्तर ख़ाली हैं।
लाल किले से सांसद आदर्श ग्राम योजना का एलान हुआ था। चंद अपवाद की गुज़ाइश छोड़ दें तो इस योजना की धज्जियां उड़ चुकी हैं। आदर्श ग्राम को लेकर बातें बड़ी बड़ी हुईं, आशा का संचार हुआ मगर कोई ग्राम आदर्श नहीं बना। लाल किले की घोषणा का भी कोई मोल नहीं रहा।

जयापुर और नागेपुर को प्रधानमंत्री ने आदर्श ग्राम के रूप में चुना है। यहां पर प्लास्टिक के शौचालय लगाए गए। क्यों लगाए गए? जब सारे देश में ईंट के शौचालय बन रहे हैं तो प्रदूषण का कारक प्लास्टिक के शौचालय क्यों लगाए गए? क्या इसके पीछ कोई खेल रहा होगा?

बनारस में क्योटो के नाम पर हेरिटेज पोल लगाया जा रहा है। ये हेरिटेज पोल क्या होता है। नक्काशीदार महंगे बिजली के पोल हेरिटेज पोल हो गए? ई नौका को कितने ज़ोर शोर से लांच किया गया था। अब बंद हो चुका है। वो भी एक ईवेंट था, आशा का संचार हुआ था। शिंजो आबे जब बनारस आए थे तब शहर के कई जगहों पर प्लास्टिक के शौचालय रख दिए गए। मल मूत्र की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं हुई। जब सड़ांध फैली तो नगर निगम ने प्लास्टिक के शौचालय उठाकर डंप कर दिया।

जिस साल स्वच्छता अभियान लांच हुआ था तब कई जगहों पर स्वच्छता के नवरत्न उग आए। सब नवर्तन चुनते थे। बनारस में ही स्वच्छता के नवरत्न चुने गए। क्या आप जानते हैं कि ये नवरत्न आज कल स्वच्छता को लेकर क्या कर रहे हैं।

बनारस में जिसे देखिए कोरपोरेट सोशल रेस्पांसबिलिटी का बजट लेकर चला आता है और अपनी मर्ज़ी का कुछ कर जाता है जो दिखे और लगे कि विकास है। घाट पर पत्थर की बेंच बना दी गई जबकि लकड़ी की चौकी रखे जाने की प्रथा है। बाढ़ के समय ये चौकियां हटा ली जाती थीं। पत्थर की बेंच ने घाट की सीढ़ियों का चेहरा बदल दिया है। सफेद रौशनी की फ्लड लाइट लगी तो लोगों ने विरोध किया। अब जाकर उस पर पीली पन्नी जैसी कोई चीज़ लगा दी गई है ताकि पीली रौशनी में घाट सुंदर दिखे।
प्रधानमंत्री के कारण बनारस को बहुत कुछ मिला भी है। बनारस के कई मोहल्लों में बिजली के तार ज़मीन के भीतर बिछा दिए गए हैं। सेना की ज़मीन लेकर पुलवरिया का रास्ता चौड़ा हो रहा है जिससे शहर को लाभ होगा। टाटा मेमोरियल यहां कैंसर अस्पताल बना रहा है। रिंग रोड बन रहा है। लालपुर में एक ट्रेड सेंटर भी है।

क्या आपको जल मार्ग विकास प्रोजेक्ट याद है? आप जुलाई 2014 के अख़बार उठाकर देखिए, जब मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में जलमार्ग के लिए 4200 करोड़ का प्रावधान किया था तब इसे लेकर अखबारों में किस किस तरह के सब्ज़बाग़ दिखाए गए थे। रेलवे और सड़क की तुलना में माल ढुलाई की लागत 21 से 42 प्रतिशत कम हो जाएगा। हंसी नहीं आती आपको ऐसे आंकड़ों पर।

जल मार्ग विकास को लेकर गूगल सर्च में दो प्रेस रीलीज़ मिली है। एक 10 जून 2016 को पीआईबी ने जारी की है और एक 16 मार्च 2017 को। 10 जून 2016 की प्रेस रीलीज़ में कहा गया है कि पहले चरण में इलाहाबाद से लेकर हल्दिया के बीच विकास चल रहा है। 16 मार्च 2017 की प्रेस रीलीज़ में कहा गया है कि वाराणसी से हल्दिया के बीच जलमार्ग बन रहा है। इलाहाबाद कब और कैसे ग़ायब हो गया, पता नहीं।

2016 की प्रेस रीलीज़ में लिखा है कि इलाहाबाद से वाराणसी के बीच यात्रियों के ले जाने की सेवा चलेगी ताकि इन शहरों में जाम की समस्या कम हो। इसके लिए 100 करोड़ के निवेश की सूचना दी गई है। न किसी को बनारस में पता है और न इलाहाबाद में कि दोनों शहरों के बीच 100 करोड़ के निवेश से क्या हुआ है।

यही नहीं 10 जून 2016 की प्रेस रीलीज़ में पटना से वाराणसी के बीच क्रूज़ सेवा शुरू होने का ज़िक्र है। क्या किसी ने इस साल पटना से वाराणसी के बीच क्रूज़ चलते देखा है? एक बार क्रूज़ आया था, फिर? वैसे बिना किसी प्रचार के कोलकाता में क्रूज़ सेवा है। काफी महंगा है।

जुलाई 2014 के बजट में 4200 करोड़ का प्रावधान है। कोई नतीजा नज़र आता है? वाराणसी के रामनगर में टर्मिनल बन रहा है। 16 मार्च 2017 की प्रेस रीलीज़ में कहा गया है कि इस योजना पर 5369 करोड़ ख़र्च होगा और छह साल में योजना पूरी होगी। 2014 से छह साल या मार्च 2017 से छह साल?
प्रेस रीलीज़ में कहा गया है कि राष्ट्रीय जलमार्ग की परिकल्पना 1986 में की गई थी। इस पर मार्च 2016 तक 1871 करोड़ खर्च हो चुके हैं। अब यह साफ नहीं कि 1986 से मार्च 2016 तक या जुलाई 2014 से मार्च 2016 के बीच 1871 करोड़ ख़र्च हुए हैं। जल परिवहन राज्य मंत्री ने लोकसभा में लिखित रूप में यह जवाब दिया था।

नमामि गंगे को लेकर कितने ईवेंट रचे गए। गंगा साफ ही नहीं हुई। मंत्री बदल कर नए आ गए हैं। इस पर क्या लिखा जाए। आपको भी पता है कि एन जी टी ने नमामि गंगे के बारे में क्या क्या कहा है। 13 जुलाई 2017 के इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा है कि दो साल में गंगा की सफाई पर 7000 करोड़ ख़र्च हो गए और गंगा साफ नहीं हुई। ये 7000 करोड़ कहां ख़र्च हुए? कोई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा था क्या? या सारा पैसा जागरूकता अभियान में ही फूंक दिया गया? आप उस आर्डर को पढ़ंगें तो शर्म आएगी। गंगा से भी कोई छल कर सकता है?

इसलिए ये ईवेंट सरकार है। आपको ईवेंट चाहिए ईवेंट मिलेगा। किसी भी चीज़ को मेक इन इंडिया से जोड़ देने का फन सबमें आ गया जबकि मेक इन इंडिया के बाद भी मैन्यूफैक्चरिंग का अब तक का सबसे रिकार्ड ख़राब है।

नोट: इस पोस्ट को पढ़ते ही आई टी सेल वालों की शिफ्ट शुरू हो जाएगी। वे इनमें से किसी का जवाब नहीं देंगे। कहेंगे कि आप उस पर इस पर क्यों नहीं लिखते हैं। टाइप किए हुए मेसेज अलग अलग नामों से पोस्ट किए जाएंगे। फिर इनका सरगना मेरा किसी लिखे या बोले को तोड़मरोड़ कर ट्वीट करेगा। उनके पास सत्ता है, मैं निहत्था हूं। दारोगा, आयकर विभाग, सीबीआई भी है। फिर भी कोई मिले तो कह देना कि छेनू आया था।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। रवीश कुमार एनडीटीवी के सीनियर एक्जीक्यूटिव एडिटर हैं। ये लेख उनके फेसबुक पोस्ट से लिया गया है।)