Monday, November 6, 2017

VVPAT-EVM में खराबी, HC का रुपाणी सरकार और EC को नोटिस

गुजरात विधानसभा चुनाव से पूर्व ही एकबार फिर से EVM मशीन और VVPAT में खराबी मामला का तूल पकड़ चुका है। यहाँ चुनाव पूर्व हुई मशीनों की जांच कें कई खामियां पाई गयी हैं। वहीँ पूरे मामले पर गुजरात हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

गुजरात हाई कोर्ट ने वीवीपैट और ईवीएम में खराबी के मसले पर चुनाव आयोग को नोटिस भेजा है. चुनाव आयोग के अलावा गुजरात सरकार को भी कोर्ट ने नोटिस भेजकर जवाब मांगा है.

बतादें कि दो राज्यों में होने वाले शुरूआती मामला गुजरात का है। जहाँ मतदान के लिए लाइ गयी EVM और VVPAT मशीनों की जांच में कई खामियां निकली हैं। जिसपर कांग्रेस ने पूरे मामले पर हाईकोर्ट की शरण ली है। वहीँ हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए EC और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति अकील कुरैशी और न्यायमूर्ति ए जे कागजी की खंडपीठ ने गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी की याचिका पर चुनाव आयोग, राज्य के प्रमुख चुनाव अधिकारी, और विधि एवं न्याय मंत्रालय के जरिये केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किए।

कांग्रेस की राज्य इकाई ने याचिका में अनुरोध किया कि दोषपूर्ण पाई गई ईवीएम और वीवीपैट सील की जायें और उनका आगामी विधानसभा चुनावों में प्रयोग नहीं हो.

न्यायमूर्ति अकील कुरैशी और न्यायमूर्ति ए जे कागजी की खंडपीठ ने गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी की याचिका पर चुनाव आयोग, राज्य के प्रमुख चुनाव अधिकारी, और विधि एवं न्याय मंत्रालय के जरिये केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किए. इन सभी को 13 नवंबर तक नोटिस के जवाब देने हैं.

कांग्रेस ने याचिका में ये कहा

कांग्रेस ने अपनी याचिका में कहा है कि कुल 70182 वीवीपैट मतदाता सत्यापन जांच पर्ची इकाइयों में करीब सात प्रतिशत पहले स्तर की जांच के दौरान दोषपूर्ण पाई गईं. साथ ही ईवीएम तथा नियंत्रण इकाइयां भी दोषपूर्ण थीं. कांग्रेस ने इन्हें सील करने की मांग करते हुए चुनाव में इनका इस्तेमाल न करने की मांग भी की है.

याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि वह या तो आयोग को निर्देश दे या खुद एक विशेषज्ञ समिति गठित करे जो दोषपूर्ण मशीनों पर गौर कर सके ताकि इनसे कोई गड़बड़ी नहीं हो सके.

राज्य में मतदान के लिए लिया गयी कुल 70182 वीवीपैट मतदाता सत्यापन जांच पर्ची इकाइयों में करीब सात प्रतिशत पहले स्तर की जांच के दौरान गड़बड़ियाँ पाई गईं। जिससे कांग्रेस को शक है कि चुनाव किसी प्रकार की बड़ी धांधली की जा सकती है। ऐसे में कांग्रेस ने HC से इन मशीनों पर रोक लगाकर सील करने की मांग करते हुए चुनाव में इनका इस्तेमाल न करने की मांग भी की है। वहीँ इस मामले में HC ने चुनाव आयोग, राज्य की विजय रुपानी सरकार को नोटिस भेज कर जवाब मांगा है।

हार्दिक ने भी साधा था निशाना

हाल ही में हार्दिक ने भी इस संबंध में ट्वीट किया था. उन्होंने लिखा था, 'पहले लेवल टेस्ट में ही चुनाव आयोग की 3500 VVPAT मशीनें फेल हुई हैं. मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि बीजेपी अब चुनाव में गोलमाल करके ही जीतेगी.'
बता दें कि गुजरात में 9 और 14 दिसंबर को दो चरणों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है. आयोग ने इस बार वीवीपैट के साथ वोटिंग कराने का फैसला लिया है.

Sunday, November 5, 2017

ऐसे करोड़पति बना ये 8TH फेल लड़का, आज CBI और IB भी लेती है मदद

23 की उम्र में ऐसे करोड़पति बना ये 8TH फेल लड़का, आज CBI और IB भी लेती है मदद : आज देश में जानलेवा ऑनलाइन ब्लू व्हेल गेम लगातार सुर्खियों में है। सरकार, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स, साइबर टीम, एथिकल हैकर्स आदि इस बात का पता लगाने में जुटे हुए हैं कि ये गेम लोगों तक कैसे पहुंच रहा है जो कि सभी के लिए हानिकारक बनता जा रहा है। आज हम आपको एक ऐसे एथिकल हैकर्स के बारे में बता रहे हैं, जो 8th क्लास में फेल हो गया था

जिसके कारण उसे घर से बहुत डांट पढ़ी थी। इस लड़के की टीएसी सिक्युरिटी नाम की साइबर सिक्युरिटी कंपनी आज करोड़ों कमा रही है। बता दें कि इस लड़के ने अपने शौक को बिजनेस का रूप दिया जिस कारण वो आज यहां तक पहुंचा है। क्या करते हैं त्रिशनित…

23 की उम्र में ऐसे करोड़पति बना ये 8TH फेल लड़का, आज CBI और IB भी लेती है मदद

– लड़के की उम्र मात्र 23 साल है जिसका नाम त्रिशनित अरोड़ा हैं। त्रिशनित लुधियाना की मिडिल क्लास फैमिली से बिलांग करते हैं, जिनकी बचपन से ही पढ़ाई में कम और कंप्यूटर में ज्यादा दिलचस्पी थी। त्रिशनित दिनभर कंप्यूटर में हैकिंग का काम सीखते थे, जिस कारण वे पढ़ाई से दूर रहे और 8th क्लास में फेल हो गए। 8th के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन आगे चल कर उन्होंने 12th के एग्जाम दिए। वे एक एथिकल हैकर है जिसमें नेटवर्क या सिस्टम इन्फ्रास्ट्रक्चर की सिक्युरिटी इवैल्युएट की जाती है। इनकी निगरानी सर्टिफाइड हैकर्स करते हैं, जिससे कि किसी नेटवर्क या सिस्टम इन्फ्रास्ट्रक्चर की सिक्युरिटी कॉन्फिडेन्शियल ही रहे।

त्रिशनित आठवीं कक्षा में फेल हो गए जिसके बाद उनका परिवार उनसे बेहद खफा था. इतना ही नहीं उनके दोस्त और स्कूल में पढ़ने वाले छात्र भी उनका मजाक उड़ाने लगे, इसके बाद अरोड़ा ने रेग्युलर पढ़ाई छोड़कर 12वीं तक कॉरेस्पॉन्डेंस से पढ़ाई की.

23 की उम्र में ऐसे करोड़पति बना ये 8TH फेल लड़का, आज CBI और IB भी लेती है मदद
त्रिशनित एक आम परिवार में जन्में थे, ऐसे में घर वालो को उनका काम पसंंद नहीं आया. त्रिशनित के पिता अकाउंटेंट थे लिहाजा उन्हें अपने बेटे का यह एथिकल हैकिंग वाला काम बिल्कुल भी पसंद नहीं था, लेकिन अरोड़ा कंप्यूटर में अपने शौक को ही कॅरियर बनाने का फैसला कर चुके थे.

CBI से लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज भी है इनकी क्लाइंट

– दो साल पहले जब उनकी उम्र 21 वर्ष थी, उन्होंने टीएसी सिक्युरिटी नाम की साइबर सिक्युरिटी कंपनी बनाई।
– त्रिशनित अब रिलायंस, सीबीआई, पंजाब पुलिस, गुजरात पुलिस, अमूल और एवन साइकिल जैसी कंपनियाें को साइबर से जुड़ी सर्विसेज दे रहे हैं।
– वे ‘हैकिंग टॉक विद त्रिशनित अरोड़ा’ ‘दि हैकिंग एरा’ और ‘हैकिंग विद स्मार्टफोन्स’ जैसी किताबें लिख चुके हैं।
दुबई-यूके में वर्चुअल ऑफिस, ऐसे मिली ट्रेनिंग
– दुबई और यूके में कंपनी का वर्चुअल ऑफिस है। करीब 40% क्लाइंट्स इन्हीं ऑफिसेस से डील करते हैं।

– मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनियाभर में 50 फॉर्च्यून और 500 कंपनियां क्लाइंट हैं। जिससे उनकी कंपनी को करोड़ों का टर्नओवर होता है।

– सेल्फ स्टडी और पिता के साथ एक्स्पेरिमेंटिंग से तैयार हुए, यूट्यूब के वीडियो से भी हेल्प मिली।

– इन्होंने नॉर्थ इंडिया की पहली साइबर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम सेटअप किया।

मिल चुके हैं कई अवॉर्ड

उनके काम को लेकर वर्ष 2013 में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने उन्हें सम्मानित भी किया था. वर्ष 2014 में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने गणतंत्र दिवस पर स्टेट अवॉर्ड दिया और वर्ष 2015 में उनको फिल्म एक्टर आयुष्मान खुराना सहित सात हस्तियों के साथ पंजाबी आइकन अवॉर्ड दिया गया था.

2014 में पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल ने गणतंत्र दिवस पर ‘स्टेट अवाॅर्ड ’ दिया।
दो हजार करोड़ के टर्नओवर पर नजर
अब त्रिशनित की नजर कंपनी के बिजनेस को यूएस ले जाने की है. उन्होंने इसी साल जनवरी में दिए एक अलग इंटरव्यू में कहा था कि वे कंपनी का टर्नओवर बढ़ाकर इसे दो हजार करोड़ रुपए तक ले जाना चाहते हैं. दुनियाभर की 500 कंपनियां इस वक्त त्रिशनित की क्लाइंट है साभार : जागरूक इंडीयन

Saturday, November 4, 2017

तो इस वजह से हुआ था वॉट्सऐप का सर्वर डाउन...

सोशल नेटवर्किंग ऐप वॉट्सऐप के सर्वर डाउन होने पर लोगों ने सोशल मीडिया पर जमकर मजे लिए। कुछ ही देर में हैशटेग वॉट्सऐप डाउन ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगा। कुछ लोगों ने तो इस हैशटेग के साथ मजेदार फोटो और विडियो को पोस्ट किया।
वॉट्सऐप के सर्वर डाउन होने के बाद अमेरिका तथा यूरोप के लोगों को लगा कि वॉट्सऐप का सर्वर सिर्फ पश्चिमी देशों में डाउन हुआ है, एशिया में यह सही से काम कर रहा है। लेकिन कुछ देर के बाद यह खबर आई की वॉट्सऐप का सर्वर पूरी दुनिया में एक साथ डाउन हुआ है।

इस वजह से हुआ था सर्वर डाउन

वॉट्सऐप का सर्वर डाउन होने की प्रमुख वजह इसके सर्वर पर लोड बढ़ने को माना गया है। जानकारों का मानना है कि एक साथ ज्यादा लोड होने की वजह से सर्वर क्रेश हो गया। जिसे रीस्टोर करने में इंजीनियर्स को काफी मशक्कत करना पड़ा।
प्ले-स्टोर के आंकड़ों के मुताबिक केवल सितंबर महीने में ही 76.4 मिलियन लोगों ने वॉट्सऐप को डाउनलोड किया, जबकि 46 मिलियन लोगों ने फेसबुक मैसेंजर को डाउनलोड किया है। वॉट्सऐप यूजर्स की बढ़ती संख्यां को देखते हुए कंपनी इसके सर्वर की कैपेसिटी बढ़ाने पर जोर दे रही है।

सर्वर के डाउन होने की दूसरी वजह वॉट्सऐप में बीते दिनों जोड़े गए नये फीचर को बताया जा रहा है। कुछ जानकारों का मानना है कि नये फीचर्स और अपडेट की वजह से भी सर्वर क्रेश हो सकता है।फिलहाल वॉट्सऐप के सर्वर को रीस्टोर किया जा चुका है और यह फिर से काम करने लगा है।

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और
ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )

Thursday, November 2, 2017

गुजरात चुनाव: आयोग के पहले लेवल के टेस्‍ट में ही फेल हुईं 3550 वीवीपीएटी मशीनें..

Gujarat Assembly Election 2017: गुजरात में नौ दिसंबर और 14 दिसंबर को मतदान होगा। नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे।

गुजरात चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली 3550 वीवीपीएटी (वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) मशीनों को चुनाव आयोग ने खराब पाया। सबसे ज्यादा खराब वीवीपीएटी मशीनें जामनगर, देवभूमि द्वारका और पाटन जिले में पाई गईं। आधिकारिक सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि गुजरात में कुल 70,182 वीवीपीएटी मशीनें इस्तेमाल की जानी हैं। गुजरात के मुख्य चुनाव आयुक्त बीबी स्वाईं ने कहा कि खराब मशीनों को उनके कारखाने में वापस भेजा जाएगा। जिन मशीनों में मामूली तकनीकी खराबी है उन्हें दुरुस्त किया जा सकता है।

एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी के अनुसार खराब पाई गईं वीवीपीएटी मशीनों में सेंसर के काम न करने, प्लास्टिक के पुर्जों के टूटे हुए होने और मतदान पेटी (ईवीएम) से जोड़ने में दिक्कत होने जैसी समस्याएं पाई गईं। चुनाव आयोग ने मतदान के दौरान खराब हो जाने वाली वीवीपीएटी को बदलने के लिए 4150 अतिरिक्त मशीनों मंगाई हैं। गुजरात में कुल 182 विधान सभा सीटे हैं। गुजरात में दो चरणों में मतदान होगा।

पहले चरण का मतदान नौ दिसंबर को होगा जिसमें कुल 89 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। दूसरे चरण का मतदान 14 दिसंबर को होगा जिसमें बाकी 93 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। चुनाव के नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे। राज्य में पिछले 22 सालों से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) लगातार सत्ता में है। बीजेपी ने राज्य के पिछले तीन विधान सभा चुनाव (2002, 2007 और 2012) नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लड़े और जीते थे। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार गुजरात विधान सभा चुनाव हो रहे हैं। गुजरात में बीजेपी की चुनावी जीत के सूत्रधार माने जाने वाले अमित शाह अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं। उन्होंने इसी साल विधायक पद से इस्तीफा देकर राज्य सभा का चुनाव लड़ा और जीता था। शाह पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से गुजरात में बीजेपी विधायक थे।

नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद गुजरात बीजेपी को कई संकटों से जूझना पड़ा। मोदी की जगह राज्य की मुख्यमंत्री बनाई गईं  आनंदीबेन पटेल की कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटाना पड़ा। उनकी जगह विजय रूपानी राज्य के सीएम बनाए गये। माना जाता है कि पटेल आरक्षण आंदोलन और उना में कुछ दलितों की पिटाई के वीडियो के वायरल होने के बाद हुए राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर नियंत्रण न रख पाने की वजह से आनंदीबेन की कुर्सी गयी थी। विधान सभा चुनाव से ठीक पहले पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल, दलित आंदोलन के नेता जिग्नेश मेवानी और पिछड़ा वर्ग के नेता अल्पेश ठाकोर के कांग्रेस के करीब आने से बीजेपी के माथे पर चिंता की लकीरें आना स्वाभाविक हैं।

Wednesday, November 1, 2017

खुल गई बीजेपी सरकार और चुनाव आयोग के मिलीभगत की पोल..

अहमदाबाद: चुनाव आयोग की उस दलील की पोल अब खुलकर सामने आ गई है जिसे उसने गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान में देरी होने पर दी थी। दरअसल, चुनाव आयोग ने गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के लिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में राज्य सरकार द्वारा राहत कार्य चलाए जाने की दलील दी थी, लेकिन हकीकत यह है कि राज्य के इन बाढ़ प्रभावित इलाकों में राज्य सरकार की ओर से राहत के रूप में अनाज का एक दाना तक नहीं दिया गया है।
दरअसल, गुजरात के कई इलाके बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित हैं। बनासकांठा के जेतड़ और खरिया जैसे कई गांव के किसानों को इस बाढ़ का प्रकोप झेलना पड़ रहा है। इन किसानों के खेत पानी में डूब गए हैं और उनके पास खेती के लिए एक हाथ की भी जमीन नहीं बची है। ऐसे में राज्य की सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार ने इन किसानों की मदद के लिए हाथ तो बढाया लेकिन खाली। सरकार ने किसानों के लिए मुआवजे का ऐलान किया लेकिन किसानों को अभी तक कुछ भी हासिल नहीं हुआ।
अपनी समस्याओं को लेकर किसानों ने मुख्यमंत्री का दरवाजा भी खटखटाया लेकिन इसके बदले में उन्हें मिला तो सिर्फ आश्वासन। धीरे-धीरे हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि अब ये किसान खुद को ठगा महसूस करने लगे हैं और चुनाव का बहिष्कार करने की योजना बना रहे हैं।

बीते कई महीनों से मुआवजे का इंतेजार करने रहे एक किसान का कहना है कि पिछले कई महीनों से मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। मैंने निजी रूप से कई बार सरकार को पत्र लिखा है। 70 से 80 किसानों को सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली है। सरकार ने सर्वे तो करा लिया है। लेकिन अगर उन्होंने हमें मदद नहीं दी, तो हम इस बार चुनावों का बहिष्कार करने की सोच रहे हैं।

वहीं एक अन्य किसान का कहना है कि सरकार ने हम लोगों को न तो किसी प्रकार का कोई मुआवजा दिया है और न ही खेती के लिए कोई वैकल्पिक जमीन दी है। सरकारी लोगों ने यहां आकर हमारे खेतों का सर्वे किया लेकिन उसके बाद कोई जवाब नहीं आया। आखिरी उम्मीद के तौर पर हमने ड्रिप इरिगेशन सिस्टम को दोबारा शुरू किया है। उम्मीद है कि यह काम करेगा और इस जमीन को थोड़ी उपजाऊ बनाएगा, ताकि खेती की जा सके।

आपको बता दें कि अधिकतर हर वर्ष हिमाचल प्रदेश और गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान एक साथ ही होता था लेकिन इस बार हिमाचल प्रदेश में चुनाव की तारीखों की गोश्ना पहले हो गई थी जबकि गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान बाद में किया गया।

इस बात को लेकर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाये थे जिसके बचाव में आयोग ने कहा था कि चुनाव आयोग ने कहा था कि बाढ़ राहत कार्य समेत अन्य चीजों को ध्यान में रखते हुए गुजरात में चुनाव की तारीख का ऐलान हिमाचल के साथ नहीं किया गया था।

Edited by Google Help